बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के दावों की हकीकत का एक मामला ये है कि उप जिला चिकित्सालय रानीखेत एकमात्र 108 एंबुलेंस सेवा के भरोसे है, जो नाकाफी है। इस अस्पताल से बड़ी आबादी जुड़ी है। ऐसे में रेफरल मरीजों को ऐन वक्त पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो पाती। उप जिला चिकित्सालय रानीखेत में एंबुलेंस की कमी है।
यह अस्पताल केवल रानीखेत ही नहीं बल्कि द्वाराहाट, चौखुटिया, भिकियासैंण, भतरौंजखान सहित गढ़वाल से सटे इलाकों के मरीजों का प्रमुख उपचार केंद्र है। ऐसे में हायर सेंटर रेफर होने वाले गंभीर मरीजों के तीमारदारों को एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो पाती और उन्हें फजीहत झेलनी पड़ती है। कई बार एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होने से गंभीर मरीजों की हालत बिगड़ जाती है और खतरा पैदा हो जाता है। अंतत: उन्हें मरीज को निजी वाहनों या ऊंचे किराये वाली निजी एंबुलेंस से हायर सेंटर पहुंचाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। गरीब तबके के मरीजों के समक्ष मुसीबत खड़ी हो जाती है। अस्पताल के बड़े क्षेत्र को देखते हुए यहां कम से कम दो से तीन सरकारी एंबुलेंसों की जरूरत है।
केस 1: ग्राम उरोली के इंदर सिंह राणा ने बताया कि कुछ माह पूर्व उनकी पत्नी को पीलिया की शिकायत हुई। वे उप जिला चिकित्सालय रानीखेत पहुंचे। डॉक्टरों ने उन्हें हल्द्वानी रेफर कर दिया। कई बार कॉल करने के बावजूद 108 एंबुलेंस नहीं मिली। मजबूरी में निजी एंबुलेंस बुलाई और महंगे खर्च पर हल्द्वानी पहुंचे।
केस 2: रानीखेत के सुरेंद्र कुमार ने बताया कि उनकी भाभी को प्रसव पीड़ा होने पर रानीखेत अस्पताल लाया गया। जहां से उन्हें हल्द्वानी रेफर किया गया। अस्पताल प्रशासन ने बताया कि 108 सेवा पहले से व्यस्त है। उन्हें आठ हजार रुपये में निजी एंबुलेंस बुक करनी पड़ी।
केस 3: सौनी के गिरीश चंद्र ने बताया कि गधेरे में गिर जाने से उनके भाई के सिर पर गंभीर चोट आई थी। उसे रानीखेत अस्पताल से हल्द्वानी रेफर किया गया। एंबुलेंस काफी देर से पहुंची। रास्ते में कैंची धाम के पास जाम में एंबुलेंस फंसी रही। समय पर इलाज नहीं मिलने से उनके भाई को नहीं बचाया जा सका।
केस 4: बिंता गांव के देवेंद्र राम ने बताया कि कुछ माह पूर्व उनकी पत्नी को प्रसव के लिए रानीखेत अस्पताल लाए। उसे हल्द्वानी रेफर कर दिया गया। एंबुलेंस व्यस्त होने से उन्हें भी निजी एंबुलेंस की मदद लेनी पड़ी, जिससे उन्हें आर्थिक संकट झेलना पड़ा।