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स्वास्थ्य प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार

Sun, 26 Jun 2016 10:43 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
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स्वास्‍थ्य गोष्ठी - फोटो : अमर उजाला
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अल्मोड़ा। ‘उत्तराखंड के सोलह साल और हमारी स्वास्थ्य सुविधाएं’ विषय पर यहां हुई गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि स्वास्थ्य प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है। लेकिन, राज्य गठन के बाद से अब तक सरकारें अपनी इस जिम्मेदारी को निभाने में नाकाम रही हैं। राज्य के अस्पतालों में डॉक्टरों के 55 फीसदी से अधिक पद खाली हैं। तकनीशियनों का अभाव है, लेकिन सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही है। 
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लोक प्रबंध विकास संस्था के तत्वावधान में हुई गोष्ठी में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकारी अस्पताल रेफरल सेंटर बनकर रह गए है। जिम्मेदारी से पीछे हटकर सरकार अस्पतालों को पीपीपी मोड में दे रही है, लेकिन इससे भी कोई अंतर नहीं आया है। राज्य के आठ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का उच्चीकरण किए बिना वहां करोड़ों खर्च कर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के भवन बना दिए गए हैं। 

उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं को आयरन की पर्याप्त गोलियां नहीं मिल रही हैं। राज्य में तीन सालों में छह हजार से अधिक शिशुओं की मृत्यु हो चुकी है। गर्भवती और धात्री महिलाओं की जांचें गांव स्तर पर कराने को खोले गए वीएचएनडी सेंटर खोखले साबित हुए हैं।
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आरोप लगाया कि अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं का प्रसव जटिल बताकर उन्हें रेफर कर दिया जा रहा है। राज्य में 24 फीसदी बच्चे कुपोषण की चपेट में हैं। एनआरएचएम से गांवों को प्रतिवर्ष दिए जाने वाले बजट में 2012 के बाद से भारी कटौती कर दी गई है। गोष्ठी की अध्यक्षता पालिकाध्यक्ष प्रकाश जोशी और संचालन संस्था के ईश्वर जोशी ने किया।

गोष्ठी में पद्मश्री डॉ. ललित पांडे, पूर्व स्वास्थ्य निदेशक डॉ. जेसी दुर्गापाल, धनी साही, प्रधान रघुवर जोशी, अशोक भोज, सुनील बाराकोटी, चंदन सिंह, सुनीता पांडे, यूसुफ तिवारी, हयात रावत, केवी पांडे, जीवन चंद्र, दीप्ति भोजक, जगमोहन पिलख्वाल, डॉ. दीवान नगरकोटी, आरपी जोशी, पूरन चंद्र तिवारी, नवीन बिष्ट, विशन बाराकोटी आदि ने विचार रखे। 
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