बागेश्वर में 13 जनवरी से शुरू होने वाले उत्तरायणी पर्व की तैयारियों जोरों पर हैं। झूला और सर्कस वाले भी यहां पहुंच गए हैं। नगर के ऐतिहासिक नुमाइशखेत में सर्कस और झूले लगेंगे। सरयू-गोमती संगम पर पवित्र स्नान के लिए नदी में सफाई अभियान भी जारी है।
मालूम हो कि बागेश्वर में उत्तरायणी के मेले का अपना विशेष महत्व है। यह मेला धार्मिक होने के साथ-साथ व्यापारिक महत्व का भी है। मेले में बड़ी संख्या में मैदानी क्षेत्रों से व्यापारी यहां आते हैं। इन व्यापारियों के लिए गोमती घाट में अलग से बाजार लगाया जाता है। इस साल भी व्यापारियों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है।
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बुधवार को झूला और सर्कस वाले बागेश्वर पहुंच गए। नुमाइशखेत में लगने वाले झूले और सर्कस इस मेले का प्रमुख आकर्षण का केंद्र रहते हैं। इस साल जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल के निर्देश पर सरयू बगड़ में दुकानें नहीं लगाई जाएंगी।
इस स्थान पर दुकानें लगने से धार्मिक कार्यों के लिए आने वाले श्रद्घालुओं को परेशानियों का सामना करना पड़ता था। अब बाजार गोमती बगड़ में लगेगी। इसके लिए नदी किनारे समतल किया गया है। सरयू नदी में सफाई अभियान जारी है। नगरपालिका द्वारा घाटों की सफाई के लिए सरयू नदी में पर्यावरण मित्र लगाए गए हैं।