कांडे गांव में इस तरह से बने हैं चाल खाल। संवाद न्यूज एजेंसी
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द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। रिस्कन नदी के पुनर्जनन को लेकर चलो गांव की ओर अभियान के तहत पौधरोपण और चाल-खाल बनाने का काम जारी है। सामाजिक कार्यकर्ता मोहन कांडपाल के नेतृत्व में कांडे गांव में खाल बनवाने का कार्य चल रहा है। इसमें कई प्रवासियों को भी रोजगार मिल रहा है।
अभियान का मुख्य उद्देश्य तेजी से सूख रही रिस्कन नदी का जलस्तर बढ़ाना है। इस कार्य में मोहन को दिल्ली राज्यसभा के पूर्व निदेशक राम चंद्र विरवानी सहयोग कर रहे हैं। जल संवर्धन और संरक्षण को लेकर कांडपाल इन दिनों कांडे गांव में खाल बनवा रहे हैं। इसके तहत उन्होंने हजारों खाल बनवाए हैं। इस बीच कोरोना काल में चाल-खाल बनवाने के काम से जहां बेरोजगारों को रोजगार मिल रहा है।
द्वाराहाट की रिस्कन घाटी में इस तरह से बन रहे चाल-खाल।
- जलस्रोत पुनर्जीवित करने के उद्देश्य को लेकर चलो गांव की ओर अभियान चलाया गया है। गांव में रहने के लिए पर्याप्त मात्रा में जलस्रोत जरूरी हैं। एकमात्र रिस्कन नदी को बचाने का बीड़ा उठाया गया है।
-मोहन कांडपाल, सामाजिक कार्यकर्ता।
-गांव में रहने के लिए पानी का होना जरूरी है। रिस्कन नदी तेजी से सूख रही है। इसके पुनर्जनन की जिम्मेदारी स्वयं को उठानी होगी। तभी कार्य सफल होगा। चाल-खाल बनाए जाने से स्रोतों को पुनर्जीवन मिलेगा। -बहादुर सिंह, बेढुली।
-रिस्कन नदी पर क्षेत्र के कई गांव निर्भर हैं। नदी से ही पेयजल योजनाएं और सिंचाई योजनाएं संचालित हैं। अब नदी का जलस्तर सूख रहा है। इसे बचाने के लिए भगीरथ प्रयासों की जरूरत है।
-घनश्याम पांडे, सरपंच कांडे।