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अमर उजाला ने तीन साल पहले ही कर दिया था आगाह

Mon, 17 Apr 2017 10:33 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, चौखुटिया (अल्मोड़ा)। 
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कर दिया था आगाह - फोटो : अमर उजाला
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चौखुटिया (अल्मोड़ा)। क्षेत्र के सबसे दूरस्थ गांव खजुरानी के पूर्व फौजी स्व. लाल सिंह की पोती सरिता की मौत का कारण न्यूरो मस्कुलर स्पार्म (तंतु, पेशियों का समन्वय न होना) बीमारी और उससे पैदा हुई अभाव भरी परिस्थितियां हैं। असल में इस बीमारी से उनके परिवार में कुल तीन सदस्यों की मौत हो चुकी है जबकि छह से भी अधिक दिव्यांग हैं। इसको लेकर अमर उजाला ने ठीक तीन साल पहले आगाह भी कर दिया था। 22 अप्रैल 2014 के अंक में छपी खबर वंश बचाने की जंग लड़ रहा देश का बहादुर फौजी इसका बड़ा सबूत है।
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क्षेत्र के सबसे दूरस्थ ग्राम पंचायत खजुरानी निवासी पूर्व फौजी स्व. लाल सिंह की छह माह पूर्व ही मौत हुई है। परिवार में स्व. लाल सिंह, उनकी बहू जानकी को छोड़ बाकी सदस्य न्यूरो मस्कुलर स्पार्म नामक बीमारी से ग्रस्त हैं। इसी रोग की चपेट में आने से स्व. लाल सिंह की पत्नी, बड़े बेटे समेत पोती की भी मौत हो चुकी है जबकि बाकी सदस्य दिव्यांगता के शिकार हैं। इलाज के अभाव में अन्य सदस्य भी जीवन की जंग लड़ रहे हैं।

अमर उजाला ने इस बीमारी के चलते परिवार के सामने पैदा हुए आर्थिक संकट को लेकर तीन साल पहले ही आगाह कर दिया था लेकिन अफसोस की इस ओर ध्यान नहीं दिया गया, जिसकी परिणति परिवार में हो रही मौतों के रूप में हो रही है। अमर उजाला ने उस दौरान खजुरानी गए राष्ट्रीय बाल सुरक्षा से जुड़े चिकित्सकों डॉ. देवेश मेहरा, डॉ. निहारिका मेहरा से बातचीत के आधार पर बीमारी के बारे में जानकारी ली थी।
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इसी कार्यक्रम के तहत फार्मेसिस्ट विनोद गड़िया आदि के प्रयासों से लाल सिंह एक पोते को उपचार कराने देहरादून भी ले गए थे लेकिन खर्च के अभाव में पर्याप्त उपचार नहीं हो पाया। अमर उजाला में तीन साल पहले इससे संबंधित खबर छपने, लोगों से सहायता की अपील करने के बाद पूर्व फौजी के खाते में लोगों ने एक लाख रुपये से भी अधिक की सहायता राशि जमा कराई थी। भूतपूर्व सैनिक संगठन आदि इसके गवाह हैं।  

चौखुटिया (अल्मोड़ा)।  पूर्व फौजी लाल सिंह की स्वाभाविक मृत्यु हुई लेकिन उनकी पत्नी भागुली देवी 35 साल में ही इस बीमारी से ग्रस्त हो गई और बाद में उनकी मौत हो गई, जबकि बड़ा बेटा खुशाल, अब पोती सरिता की भी मौत हो गई। बेटा अर्जुन (39), बेटी लक्ष्मी (41), पोता दीवान (21), हर सिंह (16) इस बीमारी से ग्रस्त होकर दिव्यांगता की चपेट में हैं। पहले लाल सिंह की पेंशन से खर्चा चल जाता था लेकिन अब उनकी बहू जानकी ही पूरे परिवार के दिव्यांग सदस्यों का पोषण कर रही हैं। समय-समय पर गांव के लोग भी मदद करते हैं।

चौखुटिया (अल्मोड़ा)। पूर्व विधायक मदन सिंह बिष्ट का कहना है कि खजुरानी में हुई दिव्यांग बालिका की मौत से स्प्ष्ट हो गया है कि प्रदेश को भय, भूख से मुक्त बनाने का दावा करने वाली भाजपा के शासन में लोग कैसे अकाल मौत के मुंह में जा रहे हैं। बिष्ट ने बालिका के निधन पर शोक जताते हुए कहा है कि यदि दिव्यांग परिवार की बालिका सचमुच भूख से मरी है जैसा कि क्षेत्रीय विधायक कह रहे हैं तो वे उस परिवार को अपनी ओर से प्रतिमाह पांच हजार रुपये का आर्थिक सहयोग देने को तैयार हैं।

चौखुटिया (अल्मोड़ा)। पूर्व सीएम हरीश रावत ने खजुरानी में दिव्यांग बालिका की मौत को शर्मनाक और चेतावनी भरा बताया है। उन्होंने अपने फेसबुक एकाउंट में घटना पर कहा है कि उनकी राज्य सरकार को सलाह है कि गांवों में ऐसे लोगों का सर्वेक्षण कराकर विशेष पेंशन स्वीकृत की जानी चाहिए। उन्होंने मामले की तहकीकात के लिए तीन सदस्यीय दल खजुरानी भेजा है। 

चौखुटिया (अल्मोड़ा)। डीएम सबिन बंसल ने कुछ दिन पूर्व ही 23 मार्च को खजुरानी में जनता दरबार लगाकर समस्याएं सुनी थी। उस समय भी ग्राम प्रधान आदि लोगों ने उनके सामने परिवार के सदस्यों की दिव्यांगता संबंधी समस्या रखी थी। बाद में खीड़ा में आयोजित शिविर में परिवार के सदस्यों के दिव्यांगता पेंशन फार्म भी भरे गए थे। इन पर तुरंत कार्रवाई भी कर दी गई थी।  

चौखुटिया (अल्मोड़ा)। स्व. लालसिंह की बहू जानकी खाना बनाने के बाद खेतों में चली जाती थी। उनके विकलांग परिजन बाद में खाना खा लेते थे। पड़ोसियों ने बताया कि सभी विकलांग खाने पर टूट पड़ते थे। इस बीच सरिता ज्यादा अस्वस्थ होने के चलते बिस्तर से उठ नहीं पा रही थी जिसके चलते वह खाना नहीं खा पाई। उसकी मां को इस बाद का अहसास नहीं था। फिर दो दिन राशन खत्म हो गया तो उन्होंने अपनी ओर से राशन दिया।   
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