लंबित मांगों को लेकर आंदोलित गुरिल्लों ने शनिवार को धरना देने के तीन हजार दिन पूरे होने पर नगर में जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि 12 वर्षों के आंदोलन के दौरान केंद्र की विभिन्न सरकारों ने गुरिल्लों के मामलों में घोषणाएं और उनके सत्यापन का कार्य तो किया, लेकिन वास्तविक रूप से गुरिल्लों को अभी तक लाठी, तिरस्कार, मुकदमों और आश्वासनों के सिवा कुछ नहीं मिला।
बाद में उन्होंने जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री, गृहमंत्री समेत उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर गुरिल्लों को नौकरी, पेंशन दिए जाने की मांग की। उन्होंने बजट सत्र में राज्य और केंद्र के खिलाफ उग्र आंदोलन की भी चेतावनी दी।
गांधी पार्क में धरना देने के बाद गुरिल्लों ने मालरोड और बाजार में जुलूस निकाला। इस दौरान हुई सभा को संबोधित करते हुए संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष ब्रह्मानंद डालाकोटी ने कहा कि केंद्र और राज्य की सरकारों ने उनकी मांगों को लेकर कभी योजना बनाने, कभी राज्यों के सहयोग से उन्हें समायोजित करने की घोषणा की। और तो और 2015 में करोड़ों रुपये खर्च कर गुरिल्लों की गिनती और सत्यापन का कार्य भी कराया, लेकिन नतीजे में मिला कुछ नहीं सिवाय तिरस्कार और मुकदमों के।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार पूर्व सैनिकों को वन रैंक वन पेंशन पर 12 हजार करोड़ खर्च करने के लिए अपनी पीठ थपथपा रही है। वहीं वर्षों तक सीमावर्ती क्षेत्रों में निशुल्क निस्वार्थ रूप से काम कर चुके गुरिल्लों को उनके बुढ़ापे में दो जून की रोटी, बीमारी में इलाज का खर्च भी नहीं देना चाहती है। उन्होंने शासनादेशों, घोषणाओं का क्रियान्वयन करने की मांग करते हुए बजट सत्र में राज्य और केंद्र स्तर पर उग्र आंदोलन करने की चेतावनी दी।
धरना प्रदर्शन और जुलूस में जिलाध्यक्ष शिवराज बनौला, भुवन चंद्र चौधरी, कैलाश साह, ध्यान सिंह, राजेंद्र सिंह भाकुनी, विशन राम, मोहन राम, जय सिंह, गोकुल सिंह, जोगा राम, अर्जुन सिंह, संजय कुमार, गोविंद बल्लभ हर्बोला, मदन सिंह नेगी, लछम सिंह, बिशन सिंह, दीवान सिंह, देवी दत्त बुधानी, चंदन सिंह, देवराम, किशन सिंह, प्रकाश जोशी, बहादुर सिंह, पूरन सिंह, दिनेश लोहनी, मोहन सिंह, गिरीश जोशी, पनी राम, बसंत लाल, खड़क सिंह, ममता मेहता, आनंदी महरा, दीप परगाई, तुलसी जलाल, पदमा देवी, गंगा देवी, भानु पंत, कृष्ण राम, कुंदन प्रसाद समेत काफी संख्या में गुरिल्ले शामिल थे।