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रोजगार की व्यवस्था करे सरकार : उपपा

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अल्मोड़ा। उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के कार्यकर्ताओं ने कोरोना महामारी में कामगारों, प्रवासियों और गरीबों की बिगड़ती आर्थिक, सामाजिक स्थिति को लेकर पार्टी कार्यालय में प्रदर्शन किया। उन्होंने सरकार से प्रवासियों, मजदूरों के लिए सम्मानजनक काम की व्यवस्था करने, मनरेगा में साल भर काम देने और बिजली-पानी के बिल माफ करने की मांग की।
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उपपा ने प्रदेश व्यापी आह्वान पर ‘ठप मजदूरी, बंद रोजगार, कामगारों की जिम्मेदारी ले सरकार’ के तहत प्रदर्शन किया। उपपा के केंद्रीय अध्यक्ष पीसी तिवारी ने कहा कि महामारी के इस दौर में जहां एक ओर प्रधानमंत्री, मंत्री और राष्ट्रपति के लिए हजारों करोड़ रुपये के नए घर बनाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कामगारों, प्रवासियों, गरीबों के साथ रोजी रोटी का गंभीर सवाल पैदा हो गया है। देश के हर जरूरतमंद नागरिक की मदद करना सरकार की जिम्मेदारी है परंतु सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही है।
वक्ताओं ने आरोप लगाया है कि महामारी और अभाव के कारण लोगों गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं। केंद्र और राज्य सरकार की अदूरदर्शिता, हवाई घोषणाओं के कारण आम जन परेशान है। राष्ट्रीय आपदा की इस स्थिति में सरकार को सभी फिजूल खर्ची बंद कर महामारी पर अंकुश लगाने और लोगों के जीवन बचाने पर ध्यान देना चाहिए। प्रदर्शन में गोपाल राम, राजू गिरी, हेमा पांडे, भारती पांडे आदि ने भाग लिया।
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ये मांगें कीं
कर्फ्यू और लॉकडाउन में छोटे व्यवसायियों के पानी और बिजली के बिल माफ हों।
सभी कामगारों और प्रवासियों के लिए सरकार रोजगार की व्यवस्था करे।
मनरेगा के अंतर्गत वर्ष भर रोजगार मिले।
प्रत्येक गरीब और बेसहारा परिवार को छह हजार रुपये की न्यूनतम मदद सरकार पहुंचाएं।
स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करे सरकार: उक्रांद
अल्मोड़ा। उत्तराखंड क्रांति दल के जिला प्रवक्ता केशव दत्त कांडपाल ने प्रदेश सरकार से स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करने की मांग उठाई है। उन्होंने मुख्यमंत्री के अल्मोड़ा दौरे को निराशाजनक करार दिया है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के अल्मोड़ा दौरे से उम्मीद थी कि वह सभी बाधाओं को दूर कर जल्द अल्मोड़ा मेडिकल कालेज संचालित करवाएंगे, ताकि कोरोना काल में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें। लेकिन सीएम ने जनता को निराश किया है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर करने को बेस अस्पताल को आवंटित धन का यदि दुरुपयोग किया गया तो उक्रांद इसे बर्दाश्त नहीं करेगा। ऐसे अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को बेनकाब किया जाएगा। उन्होंने कहा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही है। डाक्टरों की कमी बनी हुई है। फार्मासिस्टों के रिक्त पदों को पिछले पांच वर्षों से नहीं भरा गया है, जबकि ग्रामीण इलाकों में फार्मासिस्टों की प्राथमिक उपचार देने में महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। ऐसे में ग्रामीण इलाकों में मामूली बीमार होने पर लोगों को जिला मुख्यालय के अस्पताल आना पड़ता है। उन्होंने ड्रग इंस्पेक्टरों की कमी दूर कर जिलेवार भर्ती करने की भी मांग उठाई।
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