सरकारें भले ही जो भी दावे कर लें, लेकिन स्वास्थ्य सुविधाओं की हालत बहुत खराब है। जिला अस्पताल में तक डाक्टरों के कुल 26 पदों में से 16 पद खाली चल रहे हैं। जिला मुख्यालय के इस अस्पताल में दूर-दूर से मरीज आते हैं, लेकिन यहां फिजीशियन तक नहीं है।
इसके अलावा कार्डियोलॉजिस्ट, आकस्मिक चिकित्साधिकारी, वरिष्ठ चिकित्साधिकारी समेत कई विशेषज्ञ डाक्टरों का अभाव है। इससे जिले के अलावा अन्य क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को उपचार नहीं मिल पा रहा है। यह अस्पताल मात्र रेफर सेंटर बनकर रह गया है।
उत्तर प्रदेश शासनकाल में जिले के अस्पताल बेहतर स्थिति में थे, लेकिन राज्य बनने के बाद अस्पतालों की स्थिति खराब होती जा रही है। डाक्टरों और फार्मेसिस्टों के पद रिक्त होने से मरीजों की फजीहत हो रही है। जिला अस्पताल अल्मोड़ा में कार्डियोलॉजिस्ट, ईएनटी सर्जन, फिजिशियन, आकस्मिक चिकित्साधिकारी, अस्थि रोग विशेषज्ञ, पैथोलॉजिस्ट, यौन रोग, चर्म रोग विभाग में डाक्टर के एक-एक पद खाली हैं। अस्पताल में वरिष्ठ चिकित्साधिकारी के सात पदों में से पांच पद काफी समय से रिक्त हैं।
अस्पताल में डाक्टरों की कमी के बावजूद शेष दो पदों पर तैनात डाक्टरों और अस्थि रोग विशेषज्ञ को अर्द्धकुंभ में ड्यूटी के लिए हरिद्वार भेज दिया गया है। इससे वरिष्ठ चिकित्साधिकारी के सातों पद खाली हैं। सर्जन और रक्त कोष अधिकारी के पदों पर संविदा डाक्टर तैनात हैं। अस्पताल में प्रमुख चिकित्साधीक्षक, मुख्य चिकित्साधीक्षक तैनात हैं पर जरूरत के मुताबिक फार्मासिस्ट नहीं हैं। मात्र छह फार्मासिस्टों से तीन शिफ्टों में किसी तरह काम लिया जा रहा है। जिला अस्पताल में नगर के अलावा बाहरी क्षेत्रों से भी प्रतिदिन सैकड़ों रोगी उपचार कराने के लिए पहुंचते हैं। अस्पताल में डाक्टर नहीं होने से गरीब रोगियों को बैरंग लौटना पड़ता है। लोगों का कहना है कि जब जिला अस्पताल के ऐसे हैं हाल तो गांवों में दशा क्या होगी।