जीबी पंत संस्थान अल्मोड़ा ने मणिपुर के सहयोग से आर्किड की करीब 24 किस्मों को उगाने में सफलता हासिल की है।
वैज्ञानिकों के मुताबिक भारत में आर्किड की करीब नौ प्रतिशत प्रजातियां ही हैं। पर्याप्त नमी और आदर्श आर्द्रता के कारण उत्तरपूर्व भारतीय राज्य अरुणाचल, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा में आर्किड ज्यादा फलता-फूलता है।
मणिपुर में परियोजना का काम देख रहे डॉ. सुनील मारपा के मुताबिक मणिपुर में आर्किड उत्पादन की सफलता के बाद अल्मोड़ा में भी इस पुष्प को उगाने का प्रयास किया गया। मणिपुर के सहयोग से जीबी पंत संस्थान में आर्किड की करीब 24 प्रजातियां विकसित की गई हैं।
आर्किड की खासियत
आर्किड पुष्प सुगंध, सुंदरता के साथ औषधीय और भोज्य पदार्थों में भी उपयोग में लाया जाता है। यह एक बारहमासी पौधा है। इसकी तीन पंखुड़ियां होती हैं। आर्किड पुष्प नमी वाले स्थानों में उगता है। चौड़ी पत्ती वाले पेड़ों में आधार के साथ इन्हें लगाया जाता है।
चीन, ताइवान, हॉलैंड, थाइलैंड जैसे दशों की अर्थव्यवस्था में आर्किड का बड़ा योगदान है। भारत में अभी इसके व्यवसायिक उपयोग को तवज्जो नहीं मिल सकी है। हिमालयी राज्यों में राष्ट्रीय हिमालयी अध्ययन मिशन के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया है। अल्मोड़ा संस्थान में भी मणिपुर से दो दर्जन से अधिक आर्किड के पौधों को प्रयोगिक तौर पर लगाया गया है।
किरीट कुमार, नोडल अधिकारी, एनएमएचएस।