महंगाई पर अंकुश लगाने, पेट्रोलियम पदार्थों के दामों में की गई बढ़ोतरी वापस लेने समेत विभिन्न मुद्दों को लेकर भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के कार्यकर्ताओं ने बुधवार को गांधी पार्क में केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार के खिलाफ धरना दिया और विरोध दिवस मनाया। इस मौके पर हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ने लोकसभा चुनाव में महंगाई कम करने का मुद्दा उठाया था, परंतु तीन साल के शासनकाल में दैनिक उपभोग की वस्तुओं के दामों में बेतहाशा वृद्धि हुई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सस्ते गल्ले की दुकानों में गेहूं और चीनी का वितरण खत्म करने की नीति बना रही है। जिससे गरीबों को बाजार से राशन खरीदने को मजबूर होना पड़ेगा। उन्होंने अनाज को सट्टा बाजार से मुक्त कर महंगाई पर रोक लगाने, गैस को पूर्व की भांति सब्सिडी के दामों पर उपलब्ध कराने, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने, किसानों की समस्या के निदान को केंद्रीय स्तर पर वैकल्पिक कृषि नीति घोषित करने, बैंक खातों में न्यूनतम राशि की अनिवार्यता खत्म करने और निकासी की सीमा समाप्त करने की मांग उठाई।
राज्य सरकार से बिजली की दरों में की गई बढ़ोतरी वापस लेने, जल कर में प्रतिवर्ष 15 फीसदी बढोतरी रद्द कर मीटर रीडिंग के आधार पर जल कर वसूलने, सेराघाट-अल्मोड़ा पेयजल योजना का कार्य शीघ्र प्रारंभ करने, पर्वतीय क्षेत्र में कृषि और पशुपालन से जुड़े कार्यों को मनरेगा की परिधि में शामिल कर उत्तराखंड की प्रत्येक गृहिणी को साल भर में 100 दिन मानदेय का भुगतान करने, मनरेगा मजदूरी का जल्द भुगतान करने की मांग की। बाद में मांगों को लेकर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। सभा और धरने में जिला सचिव दिनेश पांडे, यूसुफ तिवारी, ललित चौधरी, शिवराज सिंह, राजेंद्र प्रसाद जोशी, योगेश कुमार टम्टा, राधा नेगी, कांता नेगी, मुमताज, शाहनवाज अंसारी, प्रमोद रावत, चंदा रानी, रितू रावत, राजरानी, नीमा जोशी, अनिरुद्ध, गायत्री आदि ने भाग लिया।