कालू सैय्यद बाबा की मजार पर इस बार उर्स समारोह 17 मई को शुरू होगा। समारोह को गंगा जमुनी तहजीब की संज्ञा दी जाती है, क्योंकि मुस्लिमों के अलावा हिंदू, सिख और ईसाई समुदाय के लोग भी हजारों की संख्या में मजार पर आकर शीश नवाते हैं रानीखेत के हजरत कालू सैय्यद बाबा की मजार पर चार दशक पहले गुलजार मंजिल निवासी मरहूम मो. शमीम ने उर्स समारोह शुरू किया था।
कहते हैं कि उन्हें बाबा ने विसारत (सपने) में दर्शन दिए थे। वर्तमान में बाबा के खादिम उर्स प्रबंधक मो. मोहसिन ने बताया कि आठ सौ साल पहले संत होने के नाते बाबा सभी लोगों को तकरीर प्रवचन और उपदेश देते थे। उनके उपदेश सुनकर हर कोई उनका मुरीद हो जाता था। वह बताते हैं कि निकटवर्ती किलकोट निवासी स्व. हर राम एक बार रात्रि में अपने घर किलकोट को अकेले जा रहे थे। रास्ते में उनके मन में घबराहट हुई, तो अचानक सफेद वस्त्र धारण किए संत ने उनका किलकोट के गधेरे तक साथ किया। कई अकीदतमंद बताते हैं कि बाबा ने सफेद कपड़े पहने कई बार दर्शन दिए। कई लोग बाबा को बाल रूप में देखने की भी बात बताते हैं। बाबा को मानने वालों में हिंदू, सिख समुदाय के लोगों की भी अच्छी खासी संख्या है।