अल्मोड़ा। श्री गणेश चतुर्थी व्रत और गणेश महोत्सव 14 सितंबर को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्य के अनुसार इस दिन भगवान गणेश की मूर्ति की स्थापना के लिए सुबह आठ बजे से दोपहर (मध्याह्न) तक का समय अत्यंत शुभ है जबकि अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:44 से दोपहर 12:34 बजे तक ही रहेगा।
पुराणों में कलियुग के भीतर भगवान गणेश और मां चंडी की उपासना को तत्काल फल देने वाला बताया गया है। ज्योतिषाचार्य डॉ. नवीन चंद्र जोशी ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार भक्तों का कल्याण करने और संसार से विघ्नों को हरने के लिए भगवान श्री गणेश ने भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को अवतार लिया था। इस वर्ष 14 सितंबर को प्रातः 7:10 बजे तक तृतीया तिथि रहेगी जिसके बाद चतुर्थी तिथि का प्रारंभ हो जाएगा। इसी दिन से देश भर में भव्य गणेश महोत्सव की शुरुआत होगी। श्री गणेश को सिद्धिदाता, विघ्नहर्ता और धन-ऐश्वर्य का प्रदाता माना गया है। शास्त्रों में मिट्टी, सोना, चांदी या गाय के गोबर से बनी गणेश प्रतिमा की पूजा को सर्वोत्तम और फलदायी बताया गया है। केमिकल या हानिकारक रंगों से बनी प्रतिमाओं का पूजन शास्त्रों में निषेध है। उन्होंने भक्तों से अपील की है कि वे केवल ऐसी पर्यावरण-अनुकूल मूर्तियों का ही चयन करें, जिससे जल विसर्जन के समय जलीय जीवों और पर्यावरण को कोई नुकसान न पहुंचे।
चंद्र दर्शन से बचें, वैदिक विधि से करें पूजा
मान्यताओं के अनुसार गणेश चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन वर्जित माना गया है क्योंकि इस दिन चंद्रमा को देखने से कलंक लगने का दोष होता है। विद्वानों का कहना है कि सच्चे मन और पूर्ण श्रद्धा के साथ वैदिक रीति-रिवाजों से की गई पूजा ही भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती है।