देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की बाजी लगा देने वाले सालम के अमर शहीद स्व. नर सिंह धानक का गांव चौकुना आजादी के 70 साल गुजर जाने के बाद भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। शहीद नर सिंह के गांव में आज तक सड़क नहीं पहुंची है। ग्रामीणों को नकदीकी स्टेशन पहुंचने के लिए पांच किमी पैदल चलना पड़ता है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भी काफी दूर है। सुविधाओं के अभाव में गांव से पलायन हो रहा है।
स्वतंत्रता संग्राम के दौरान 25 अगस्त 1942 को जैंती तहसील के धामद्यौ में सालम के क्रांतिकारियों और ब्रिटिश सेना के बीच युद्ध हो गया। जिसमें सालम के चौकुना गांव निवासी नर सिंह धानक दुश्मन की गोली लगने से शहीद हो गए। सालम के शहीदों की स्मृति में हर साल 25 अगस्त को धामद्यौ में शहीद दिवस समारोह मनाया जाता है। शहीदों को श्रद्धांजलि देने हर बार नेता पहुंचते हैं और मंच से शहीदों के गांवों के विकास के लिए कई घोषणाएं करते हैं, लेकिन इन पर अमल आज तक नहीं हुआ है। सालम के अमर शहीद स्व. नर सिंह धानक का गांव चौकुना में आजादी के 70 साल बाद भी सड़क नहीं पहुंची है। ग्रामीणों को नजदीकी स्टेशन बिरखम पहुंचने के लिए पांच किमी दूरी पैदल तय करनी पड़ती है। इस गांव से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भी काफी दूर है। ग्रामीण गंभीर रोगियों को डोली में लाते हैं, लेकिन कई बार रोगी सड़क में पहुंचने से पहले ही रास्ते में दम तोड़ देते हैं।
युवक मंगल दल चौकुना के अध्यक्ष कृष्णा सिंह धानक ने बताया कि ग्रामीण कई सालों में शहीद नर सिंह के नाम पर पुस्तकालय की स्थापना करने, गांव में उनकी आदमकद प्रतिमा स्थापित करने, शहीद की स्मृति में बिरखम में प्राथमिक चिकित्सा केंद्र खोलने की मांग करते आ रहे हैं। इन मांगों को लेकर हर साल शहीद दिवस समारोह में मुख्यमंत्रियों समेत अन्य नेताओं को ज्ञापन भी दिए लेकिन अब तक एक भी मांग पूरी नहीं हुई है।