रानीखेत (अल्मोड़ा)। कुमाऊं के टाइगर के नाम से प्रख्यात स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. मदन मोहन उपाध्याय की जयंती यहां धूमधाम से मनाई गई। स्वतंत्रता संग्राम के आंदोलन में स्व. उपाध्याय ने पूरे कुमाऊं में आंदोलन की अलख जलाई और ब्रिटिश हुक्मरानों की नाक में दम कर दिया था। हालात यह थे कि ब्रिटिश शासकों ने उपाध्याय की गिरफ्तारी के लिए 10 हजार रुपए का इनाम तक घोषित किया था। सुभाष चौक पर तमाम संगठनों के पदाधिकारियों ने उन्हें याद किया।
स्व. मदन मोहन उपाध्याय का जन्म 25 अक्तूबर 1910 को द्वाराहाट के बमनपुरी गांव में हुआ था, वह बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के थे। बताते हैं कि मदन मोहन मालवीय से प्रभावित होकर उनका नाम मदन मोहन रखा गया था। द्वाराहाट और नैनीताल से प्राथमिक और इंटर की शिक्षा प्राप्त करने के बाद वह इलाहाबाद चले गए।
जहां वह स्वतंत्रता सेनानियों के चर्चित केंद्र स्थल आनंद भवन में रहे। यहीं से उनके मन में भारत मां को गुलामी की बेड़ियों से मुक्ति दिलाने की प्रेरणा मिली। यहां जयंती समारोह में वक्ताओं ने कहा कि यहां पहुंचकर वह अभियान में जुट गए, पूरे कुमाऊं में उन्होंने आंदोलन की अलख जलाई।
रानीखेत उपमंडल में उन्होंने ब्रिटिश हुक्मरानों को खासा परेशान किया। वह वेश बदलकर आंदोलन की रणनीति को अंजाम देते थे। इसीलिए ब्रिटिश हुक्मरान उनसे परेशान रहे और गिरफ्तारी के लिए उन पर 10 हजार रुपए का इनाम घोषित कर दिया। इस दौरान उन्होंने मुंबई से भी आंदोलन का संचालन किया। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में उन्हें मासी गांव से गिरफ्तार किया गया। कई बार जेल गए।
आजादी के बाद वह द्वाराहाट क्षेत्र से विधायक भी चुने गए। 1978 को मदन मोहन उपाध्याय का रानीखेत में निधन हो गया। जयंती मनाने वालों में छावनी उपाध्यक्ष मोहन नेगी, पत्रकार विमल सती, डीएन बड़ोला, मदन माहरा, शेर सिंह राणा, देवीदत्त कबडवाल, अशोक पंत, मनोज अग्रवाल, मनोज पाल सहित तमाम लोग मौजूद थे।