जंगलों से घायल अवस्था में अथवा हिंसक होने के बाद पकड़े जाने वाले तेंदुओं को मृग विहार के रेस्क्यू सेंटर में रखने के लिए एक बड़ा बाड़ा और चार रात्रि बाड़े बनाए जाएंगे। इस बारे में शासन को 82.30 लाख रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है और मंजूरी मिलने के बाद इस पर काम शुरू कर दिया जाएगा। वर्तमान में यहां तीन रात्रि बाड़े हैं जो तेंदुओं की संख्या अधिक होने पर कम पड़ जाते हैं।
सिविल सोयम वन प्रभाग के अंतर्गत मृग विहार एनटीडी में संचालित रेसक्यू सेंटर में अल्मोड़ा के अलावा पिथौरागढ़, बागेश्वर और चंपावत जिले के विभिन्न क्षेत्रों मेें हिंसक और घायल हो चुके तेंदुओं को पकड़कर उपचार किया जाता है, लेकिन उपचार के बाद इन्हें रखने के लिए कोई विशेष सुविधा नहीं होने से हिंसक तेंदुओं को फिर से जंगल छोड़ना पड़ता है।
रेस्क्यू सेंटर में पर्याप्त जगह नहीं होने के कारण कई बार पूरी तरह स्वस्थ होने से पहले ही तेंदुओं को जंगल में छोड़ दिया जाता है। हालांकि मृग विहार में वर्तमान में तीन रात्रि बाड़े हैं, लेकिन जिस तरह से तेंदुओं के हिंसक होने और आए दिन पकड़े जाने की घटनाएं हो रही हैं, उसे देखते हुए यह बाड़े कम पड़ रहे हैं।
इसे देखते हुए मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक की ओर जारी निर्देश के बाद वन विभाग ने कैंपा योजना के तहत कुछ माह पहले एक बाड़ा और चार रात्रि बाड़े बनाने के लिए 82.30 लाख रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। सिविल सोयम वन प्रभाग के डीएफओ आरसी शर्मा ने बताया कि रात्रि बाड़े और तेंदुए के लिए बड़ा बाड़ा बनने के बाद हिंसक जानवरों को यहां सुरक्षित रखा जा सकेगा। फिलहाल उन्होंने बताया कि इसके लिए पैसा आने के बाद कार्य शुरू किया जा सकेगा।