दन्या (अल्मोड़ा)। धौलादेवी विकासखंड के जंगल धू-धू कर जल रहे हैं। क्षेत्र के कई वन क्षेत्र भीषण आग की चपेट में हैं जिससे करोड़ों की वन संपदा नष्ट होने के साथ पर्यावरण और जनजीवन पर भी गंभीर असर पड़ रहा है। वन्यीजव इस आग मं झुलसकर मर रहे हैं। स्थानीय लोगों ने वन विभाग पर वनों को बचाने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाने का आरोप लगाया है।
क्षेत्र के टकोली, आरा सलपड़, मुनौली, खेती, दचौरी और धरमघर समेत कई जंगलों में लगातार आग लगी है। आग से उठ रहे धुएं के कारण पूरे इलाके की हवा दूषित हो गई है। धुंध और प्रदूषण के चलते लोगों को सांस लेने में परेशानी हो रही है और बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
वनाग्नि का असर वन्यजीवों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। जंगलों में आग फैलने से जंगली जानवर सुरक्षित स्थानों की तलाश में आबादी की ओर रुख कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि आग और धुएं से बड़ी संख्या में वन्यजीवों की मौत होने की आशंका है। इससे आने वाले समय में मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ने का खतरा भी पैदा हो गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार हर साल वन संरक्षण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च करती है लेकिन जमीनी स्तर पर हालात नहीं बदल रहे हैं। वहीं चीड़ की पत्तियों (पिरोल) से रोजगार सृजन के दावे भी अब तक धरातल पर नजर नहीं आए हैं। क्षेत्रीय वन रक्षक निखिल बिष्ट ने बताया कि वन विभाग की टीम लगातार आग बुझाने में जुटी हुई है। उन्होंने कहा कि कई मामलों में मानवीय लापरवाही भी आग का कारण बन रही है। खेतों में खरपतवार और कूड़ा जलाने के बाद आग छोड़ देने से तेज हवा के साथ वह जंगलों तक पहुंच रही है जिससे आग विकराल रूप ले रही है।
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जंगलों की आग से धुएं घिरा सोमेश्वर
सोमेश्वर (अल्मोड़ा)। सोमेश्वर क्षेत्र के जंगलों में लगातार लग रही आग और किसानों की ओर से खेतों में गेहूं का भूसा जलाने से पूरे इलाके में धुएं और धुंध की चादर छा गई है। जंगलों से उठ रहा धुआं अब बाजारों और गांवों तक पहुंचने लगा है जिससे लोगों को सांस लेने में परेशानी और आंखों में जलन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर दृश्यता भी प्रभावित हुई है।
पिछले कुछ दिनों से जंगलों में आग की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। तेज हवाओं के कारण आग तेजी से फैल रही है जिससे वन संपदा को भारी नुकसान पहुंच रहा है। सोमेश्वर रेंज के कई गांवों के आसपास धुएं का असर साफ दिखाई दे रहा है और लोगों में चिंता का माहौल बना हुआ है। वन विभाग और फायर टीम आग पर काबू पाने के प्रयास में जुटी हुई है, लेकिन सूखे मौसम और तेज हवाओं के चलते आग बुझाने में काफी दिक्कत आ रही है।
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गांव तक पहुंची वनाग्नि
रानीखेत (अल्मोड़ा)। ताड़ीखेत विकास खंड के सिंगोली ग्राम क्षेत्र के समीप जंगल में लगी भीषण आग गुरुवार देर शाम गांव तक पहुंच गई, जिससे करीब पंद्रह परिवारों पर खतरा मंडराने लगा। आग तेजी से फैलने लगी तो ग्रामीणों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। वन कर्मियों ने करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर बमुश्किल काबू पाया। समय रहते आग बुझाए जाने से बड़ा हादसा टल गया। वन दरोगा होशियार सिंह के नेतृत्व में फारेस्ट गार्ड भोपाल मेहता, फायर वाचर अनुज कुमार तथा जितेंद्र बिष्ट ने मोर्चा संभाला। टीम की त्वरित कार्रवाई के चलते आग को गांव की आबादी तक पहुंचने से रोक लिया गया। वन क्षेत्राधिकारी रानीखेत तापस मिश्रा ने लोगों से जंगलों में आग से बचाव को लेकर सतर्कता बरतने की अपील की है।
जंगलों की आग से बेघर हो रहे वन्यजीव
रानीखेत (अल्मोड़ा)। पहाड़ों के जंगलों में लगातार धधक रही आग अब वन्यजीवों के लिए भी गंभीर संकट बनती जा रही है। वनाग्नि के कारण जहां हरे-भरे जंगल राख में तब्दील हो रहे हैं वहीं वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास भी तेजी से नष्ट हो रहे हैं।
इसी बीच एक मार्मिक तस्वीर सामने आई है जिसमें एक बंदरिया अपने छोटे बच्चे के साथ सड़क किनारे बैठी दिखाई दे रही है। तस्वीर मानो जंगलों में लगी आग का दर्द और वन्यजीवों की बेबसी खुद बयां कर रही हो। भोजन और सुरक्षित ठिकाने की तलाश में बंदरिया अपने बच्चे को लेकर जंगल से बाहर आबादी वाले क्षेत्र की ओर पहुंच गई।
यह तस्वीर नेचर फोटोग्राफर कमल गोस्वामी ने अपने कैमरे में कैद की। कमल गोस्वामी ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से जंगलों में लगातार आग लग रही है, जिसके चलते वन्यजीव बेहद परेशान हैं। उन्होंने कहा कि जंगल जलने से जानवरों के आश्रय स्थल और भोजन के स्रोत समाप्त हो रहे हैं, जिस कारण वे मजबूरी में सड़कों और गांवों की ओर आने लगे हैं। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि यदि समय रहते वनाग्नि पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया तो इसका गंभीर असर वन्यजीवों और पर्यावरण दोनों पर पड़ेगा।
जंगल की आग के लीसा डिपो की ओर बढ़ने से मची खलबली
अल्मोड़ा। जिले में जंगलों में आग का कहर अब भी जारी है। फायर सीजन से शुरू होने से अब तक फायर स्टेशन अल्मोड़ा ने जिले में 56 से अधिक स्थानों पर जंगल की आग पर काबू पाया लेकिन फिर भी जंगलों के सुलगने का सिलसिला थमा नहीं है। जंगलों में कई हेक्टेयर क्षेत्र में बहुमूल्य वन संपदा आग की भेंट चढ़ चुकी है। अब शुक्रवार की दोपहर चितई मंदिर के समीप जंगल में अचानक आग भड़क गई। देखते ही देखते आग यहां स्थित लीसा डिपो और मंदिर परिसर की ओर तेजी से बढ़ने लगी। इसके श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में अफरातफरी मच गई। आग से मंदिर पूरी तह धुएं की आगोश में समां गया। शुक्रवार की दोपहर 2:16 बजे फायर स्टेशन को सूचना मिली कि चितई मंदिर के समीप जंगल में आग लग गई है। आग तेजी से मंदिर परिसर और जंगल में स्थित लीसा डिपो की ओर बढ़ रही है। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची फायर सर्विस की टीम ने एक घंटे आग पर पानी की बौछार कर आग को किसी तरह शांत किया। आग से जंगल में दो हेक्टेयर क्षेत्र में बहुमूल्य वन संपदा खाक हो गई। सीएफओ नरेंद्र सिंह कुंवर ने बताया कि समय रहते जंगल की आग को काबू कर लिया गया।
टाटिक हेलीपैड से बुलानी पड़ी अतिरिक्त यूनिट
आग में विकराल रूप लेने पर टाटिक हेलीपैड में तैनात फायर यूनिट को भी तुरंत मौके पर बुलाया गया। टीम के पहुंचने से आग बुझाने में जुटी फायर सर्विस टीम को राहत पहुंची। अतिरिक्त टीम के पहुंचने पर दो घंटे तक आग पर पंपिंग की गई। आखिरकार टीम को जंगल में धधकी आग को शांत करने पर सफलता मिली। आग के काबू होने पर लोगों ने राहत की सांस ली। टीम में ओम प्रकाश, हरि सिंह अधिकारी, योगेश शर्मा, प्रियांशु कुमार, जीवन जोशी, मोहम्मद असरफ, महमूद अली, आकांक्षा, चांदनी शामिल रहीं।
जंगल की आग मामले में अज्ञात लोगों पर मुकदमा दर्ज
अल्मोड़ा। जनपद में लगातार बढ़ रही वनाग्नि की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन और वन विभाग ने जंगलों में आग लगाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। आग लगाने के मामले में साेमेश्वर और धौलछीना थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
सोमेश्वर क्षेत्र में शैल-सिरकोट-कफड़खान मोटर मार्ग से लगे जंगल क्षेत्र में 20 मई को आग लगने की घटना सामने आई थी। राजस्व उप निरीक्षक पाखुड़ा की ओर से कोतवाली सोमेश्वर में दी गई तहरीर के अनुसार आग जंगलात की भूमि से फैलकर ग्राम जोशयाना के नाप खेतों तक पहुंच गई थी। संयुक्त निरीक्षण के दौरान वन पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने भी नुकसान का जायजा लिया। मामले को गंभीर मानते हुए अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। जागेश्वर वन क्षेत्र के अंतर्गत तोली, बीना और बरतोली क्षेत्र में नाप भूमि और खेतों में लगातार आग लगाए जाने की शिकायत सामने आई है। वन विभाग के अनुसार कुछ शरारती तत्वों की ओर लगाई जा रही आग बढ़ते तापमान और सूखे मौसम के कारण तेजी से आरक्षित और सिविल वनों तक फैल रही है, जिससे वन संपदा को भारी नुकसान पहुंच रहा है। कार्यालय वन क्षेत्राधिकारी जागेश्वर वन क्षेत्र, सिविल सोयम वन प्रभाग अल्मोड़ा की ओर से धौलछीना थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।