अल्मोड़ा। लॉकडाउन और बारिश ने राज्य की अर्थव्यवस्था को भले ही चोट पहुंचाई है, लेकिन जंगलों के लिहाज से यह काफी फायदेमंद साबित हुआ है। इस सीजन में जंगलों की आग के मामले कई दशकों बाद काफी कम आए हैं। वन विभाग इस आंकड़े को देखकर काफी राहत महसूस कर रहा है।
फायर सीजन में दावानल की घटनाओं से लाखों की बहुमूल्य संपदा नष्ट हो जाती है और इस संपदा को बचाने की चुनौती वन विभाग के सामने हर वर्ष रहती है। इन दिनों विभाग को जंगलों की आग से निपटने के लिए जूझना पड़ता है लेकिन इस बार का सीजन विभाग के लिए राहत भरा रहा। इस साल जिले में दोनों प्रभागों में जंगलों की आग के मात्र 18 मामले ही हुए हैं। इनमें 29 हेक्टेयर वन क्षेत्र जला, जबकि पिछले वर्ष रिकॉर्ड तोड़ 383 मामले दर्ज किए गए थे। इनमें 800 हेक्टेयर से अधिक के जंगल जलने की बात सामने आई थी। जनपद में दो लाख हेक्टेयर से अधिक जंगल हैं। इस वर्ष कुछ दिनों के अंतराल में बारिश होने से जंगल में नमी अधिक रही, जिसकी वजह से वनों में आग कम लगी। विभाग का मानना है कि लॉकडाउन ने भी इस बार जंगलों की आग से निजात दिलाई। लॉकडाउन के बीच लोगों की आवाजाही कम रही और पर्यटकों की कम आमद भी इसकी वजह बताई जा रही है। क्योंकि जंगलों में पिकनिक आदि गतिविधियों के दौरान भी आग लगने की आशंका रहती है।
वर्ष - घटनाएं - क्षतिग्रस्त वन संपदा
2016 - 221 - 592.1 हेक्टेयर।
2017 - 142 - 343. 64 हेक्टेयर।
2018 - 227 - 551.66 हेक्टेयर।
2019 - 383 - 822.9 हेक्टेयर।
2020 में अब तक कुल मामले 18
- प्रभावित वन भूमि-29 हेक्टेयर।
जिले के दोनों प्रभागों में इस बार जंगलों की आग के मात्र 18 मामले प्रकाश में आए हैं। इस बार बारिश के साथ लॉकडाउन के कारण बहुत कम मामले आ रहे हैं। जंगलों की आग के इतने कम मामले कई दशकों बाद हुए हैं। विभागीय कर्मचारी भी अपनी तरफ से जंगलों की सुरक्षा के लिए कार्य कर रहे हैं।
- महातिम यादव, डीएफओ अल्मोड़ा।