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Almora: स्कूल जा रही छात्रा सुयाल नदी में बही, आपदा में लोगों को राहत पहुंचाने के दावे हो रहे झूठे साबित

Fri, 28 Jul 2023 03:46 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, धौलछीना (अल्मोड़ा)।

सार

स्कूल जाते समय सुयाल नदी पार करते समय एक छात्रा नदी में गिर गई। गनीमत ये रही कि आसपास के ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए उसे नदी से निकाला और उपचार के लिए पीएचसी बाड़ेछीना पहुंचाया। अब उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।
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फोटो- 26 एएलएम 11 पी- पीसीएचसी बाड़ेछीना में नदी में गिरी छात्रा का उपचार करते स्वास्थ्य कर्मी।
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विस्तार
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भले ही आपदा में लोगों को राहत पहुंचाने के दावे हो रहे हैं लेकिन आपदाकाल में सरकारी मशीनरी की लापरवाही और अनदेखी आम जनता के साथ ही विद्यार्थियों पर भारी पड़ रही है। ऐसा ही एक मामला भैंसियाछाना विकासखंड के धन्यान गांव में सामने आया है।

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यहां सुयाल नदी में 13 साल बाद भी पुल नहीं बना। बुधवार को स्कूल जाते समय सुयाल नदी पार करते समय एक छात्रा नदी में गिर गई। गनीमत ये रही कि आसपास के ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए उसे नदी से निकाला और उपचार के लिए पीएचसी बाड़ेछीना पहुंचाया। अब उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।

लमगड़ा विकासखंड के ठाणा मटैना गांव की कक्षा नौ की छात्रा ममता पुत्री शंकर राम भैंसियाछाना विकासखंड के उच्चतर माध्यमिक विद्यालय धन्यान के लिए रवाना हुई। लेकिन पुल न होने से सुयाल नदी में पत्थरों के जरिए पार करते समय उसका पैर फिसल गया और वह नदी में गिरकर बहने लगी।
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आपदा से बचाव और सुरक्षा के दावों को झूठे

छात्रा के साथियों ने मदद के लिए शोर मचाया तो आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे। उन्होंने उफनाई नदी में कूदकर किसी तरह से उसे बाहर निकाला और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बाड़ेछीना पहुंचाया। उपचार के बाद डॉक्टर ने छात्रा को घर भेज दिया।

इस घटना के बाद ग्रामीणों में आक्रोश है। उनका कहना है कि कई बार पुल बनाने की मांग की गई लेकिन उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिले। वहीं इस पूरे मामले ने सरकारी तंत्र के खोखले दावों की पोल खोलने के साथ ही आपदा से बचाव और सुरक्षा के दावों को झूठा साबित किया है।

शिक्षक, अभिभावक चिंतित मगर महकमा बना लापरवाह
भैंसियाछाना और लमगड़ा विकासखंड को जोड़ने वाला धन्यान गांव के पास बहने वाली सुयाल नदी में बना पुल वर्ष 2010 की आपदा में बह गया था जो अब तक नहीं बन सका है। कई बार क्षेत्र के लोगों ने पुल निर्माण की मांग की। लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई, जिसकी मार दोनों विकासखंडों के 40 गांवों की तीन हजार से अधिक की आबादी सहने के लिए मजबूर है। हालात यह हैं कि 30 से अधिक विद्यार्थी हर रोज जान जोखिम में डालकर नदी में पड़े पत्थरों और बोल्डरों के जरिए इसे जान हथेली पर रखकर पार कर रहे हैं और सरकारी मशीनरी किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रही है।

धन्यान के ग्राम प्रधान हरीश सिंह ने बताया कि सुयाल नदी पर बहे पुल के निर्माण के लिए 13 साल से जिले के आला अधिकारियों से गुहार लगाई गई जो अब तक नहीं सुनी गई। हर बीडीसी बैठक में यह मामला उठाया जाता रहा है। लेकिन नतीजा शून्य रहा। हालात यह हैं कि अब तक कई जानवर यहां नदी में डूबकर काल के गाल में समा चुके हैं। सरकारी मशीनरी की इस अनदेखी से नदी को जान जोखिम में डालकर पार करने की दोनों विकासखंडों के लोगों की नियति बन चुकी है। दिक्कत तब बढ़ जाती है जब आपदाकाल में नदी उफान पर आती है। इसके बाद भी इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
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कई दिनों तक स्कूल नहीं पहुंचते विद्यार्थी

भैंसियाछाना। प्रधान हरीश सिंह ने बताया कि बारिश में नदी का जलस्तर बढ़ने से विद्यार्थी कई दिनों तक स्कूल नहीं जा पाते। हर साल यही सिलसिला चलता है। कई बार अभिभावक बच्चों को नदी पार करवाते हैं, तब जाकर वे स्कूल पहुंचते हैं। वहीं शिक्षक कैलाश डोलिया ने कहा कि बारिश में उफनाई नदी को पार करना जोखिम भरा है। ऐसे में विद्यार्थियों को नदी पार न करने को कहा है।

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सुयाल नदी में पुल क्यों नहीं बना, इसकी जानकारी देने के लिए संबंधित विभाग को निर्देशित किया गया है। लोनिवि और जिला पंचायत को संयुक्त रूप से निरीक्षण कर पुल निर्माण की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। जल्द पुल निर्माण के प्रयास होंगे। इस संबंध में फिलहाल मेरे पास कोई शिकायत नहीं आई है। - गोपाल सिंह चौहान, एसडीएम, सदर।
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