शिक्षक, अभिभावक चिंतित मगर महकमा बना लापरवाह
भैंसियाछाना और लमगड़ा विकासखंड को जोड़ने वाला धन्यान गांव के पास बहने वाली सुयाल नदी में बना पुल वर्ष 2010 की आपदा में बह गया था जो अब तक नहीं बन सका है। कई बार क्षेत्र के लोगों ने पुल निर्माण की मांग की। लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई, जिसकी मार दोनों विकासखंडों के 40 गांवों की तीन हजार से अधिक की आबादी सहने के लिए मजबूर है। हालात यह हैं कि 30 से अधिक विद्यार्थी हर रोज जान जोखिम में डालकर नदी में पड़े पत्थरों और बोल्डरों के जरिए इसे जान हथेली पर रखकर पार कर रहे हैं और सरकारी मशीनरी किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रही है।
धन्यान के ग्राम प्रधान हरीश सिंह ने बताया कि सुयाल नदी पर बहे पुल के निर्माण के लिए 13 साल से जिले के आला अधिकारियों से गुहार लगाई गई जो अब तक नहीं सुनी गई। हर बीडीसी बैठक में यह मामला उठाया जाता रहा है। लेकिन नतीजा शून्य रहा। हालात यह हैं कि अब तक कई जानवर यहां नदी में डूबकर काल के गाल में समा चुके हैं। सरकारी मशीनरी की इस अनदेखी से नदी को जान जोखिम में डालकर पार करने की दोनों विकासखंडों के लोगों की नियति बन चुकी है। दिक्कत तब बढ़ जाती है जब आपदाकाल में नदी उफान पर आती है। इसके बाद भी इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
कई दिनों तक स्कूल नहीं पहुंचते विद्यार्थी
भैंसियाछाना। प्रधान हरीश सिंह ने बताया कि बारिश में नदी का जलस्तर बढ़ने से विद्यार्थी कई दिनों तक स्कूल नहीं जा पाते। हर साल यही सिलसिला चलता है। कई बार अभिभावक बच्चों को नदी पार करवाते हैं, तब जाकर वे स्कूल पहुंचते हैं। वहीं शिक्षक कैलाश डोलिया ने कहा कि बारिश में उफनाई नदी को पार करना जोखिम भरा है। ऐसे में विद्यार्थियों को नदी पार न करने को कहा है।
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सुयाल नदी में पुल क्यों नहीं बना, इसकी जानकारी देने के लिए संबंधित विभाग को निर्देशित किया गया है। लोनिवि और जिला पंचायत को संयुक्त रूप से निरीक्षण कर पुल निर्माण की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। जल्द पुल निर्माण के प्रयास होंगे। इस संबंध में फिलहाल मेरे पास कोई शिकायत नहीं आई है।
- गोपाल सिंह चौहान, एसडीएम, सदर।