अल्मोड़ा। गर्मी का सीजन आने वाला है, लेकिन जिले में आग से बचाव के पर्याप्त साधन नहीं हैं जिससे तमाम क्षेत्रों में आग का खतरा बना हुआ है। अल्मोड़ा और रानीखेत को छोड़कर सभी कस्बे बाजार और तहसील मुख्यालय आग से बचाव की दृष्टि से असुरक्षित हैं।
वर्तमान में जिला मुख्यालय अल्मोड़ा और रानीखेत के अलावा किसी भी तहसील मुख्यालय में अग्निशमन केंद्र नहीं हैं। यह दोनों अग्निशमन केंद्र इन दोनों नगरों में आग बुझाने के लिए तो उपयुक्त हैं, लेकिन यहां से जिले के दूसरे इलाके में जाकर आग पर काबू पाना संभव नहीं है। ज्ञातव्य हो कि अब तक द्वाराहाट, चौखुटिया, भिकियासैंण, चौखुटिया, मौलेखाल, सोमेश्वर दन्यां, भनोली, जैंती, भतरौंजखान सहित अन्य किसी तहसील मुख्यालय अथवा कोई बड़े कस्बों में अग्निशमन केंद्र नहीं हैं।
यदि इन जगहों पर कभी आग की बढ़ी घटना हो जाए तो रानीखेत अथवा अल्मोड़ा से वहां तक पहुंचने में घंटों लग जाएंगे और इस स्थिति में आग पर काबू पाना संभव नहीं होगा। कई बार ऐसा हो भी चुका है जब इन कस्बों में हुए अग्निकांडों में लाखों की संपत्ति स्वाहा हो गई।
उल्लेखनीय है कि रानीखेत से द्वाराहाट 30 किमी, चौखुटिया 45, भिकियासैंण 50, भतरौजखान 28, मौलेखाल 100 तथा देघाट 95 किमी है। इसी तरह अल्मोड़ा से सोमेश्वर 40 किमी तथा दन्यां 90 किमी दूर है। अग्निशमन वाहनों को पहाड़ी मार्गों से इतनी दूरी तय करने में कई घंटे लग जाएंगे। जाहिर है जब तक इन बड़े कस्बों और नगरों में ही अग्निशमन की व्यवस्था नहीं होगी तब तक इन बाजारों और कस्बों को अग्नि की दृष्टि से सुरक्षित नहीं कहा जा सकता।
अल्मोड़ा। पुलिस अधीक्षक कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक करीब एक साल पहले द्वाराहाट, भिकियासैंण, सल्ट, सोमेश्वर, दन्या तथा जैंती में अग्निशमन केंद्र खोलने के लिए प्रस्ताव शासन को भेजे गए हैं लेकिन इन प्रस्तावों को शासन से मंजूरी नहीं मिली है।
डीजीपी सुभाष जोशी ने बीते दिनों अल्मोड़ा भ्रमण के दौरान नए अग्निशमन केंद्रों को मंजूरी दिलाने का आश्वासन दिया था लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। फिलहाल जिले के अन्य इलाकों में आग की घटनाएं होने पर अल्मोड़ा और रानीखेत से ही अग्निशमन दल भेजे जाते हैं।