सोमेश्वर (अल्मोड़ा)। सरकार खेती को बढ़ावा देकर ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाने के दावे कर रही है, लेकिन जंगली सुअरों और बंदरों से फसलों को हो रहे नुकसान को रोकने के लिए कोई कारगर कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। इससे किसान खेती से विमुख हो रहे हैं। सरकारी अनदेखी से भी किसानों में आक्रोश है।
घाटी क्षेत्र में धान, आलू, गेहूं, सब्जियों समेत अन्य फसलों का उत्पादन होता है। कई किसानों की आजीविका खेती पर ही निर्भर है, लेकिन पिछले कुछ साल से दिन में बंदर तो रात में जंगली सुअरों के झुंड खेती को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इस कारण किसानों का खेती से भी मोहभंग हो रहा है। वहीं कटखने बंदरों से खासकर बच्चों और महिलाओं को खतरा रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार को फसल को जंगली जानवरों से बचाने के लिए व्यवस्था करनी चाहिए।
घाटी के इन गांवों में है जंगली जानवरों का आतंक
दलमोड़ी, भंडारीगांव, अर्जुनराठ, रतुराठ, मल्लाखोली, भानाराठ, बमनफल्यां, नारंगतोली, टाना, पल्यूड़ा, हट्यूड़ा, रैत, सर्प, माला, बैगनियां, झुपुलचौरा, बयालाखालसा, लोद, बले, चनौदा, शैल, खीराकोट, छानी, रनमन, मनान, खर्कवाल समेत दर्जनों गांवों में।
सुअरों और बंदरों ने खेती चौपट कर दी है। आलू और धान का उत्पादन कर लोगों की आजीविका चलती थी। बरसात में काफी सब्जी उत्पादन होता था, लेकिन सुअर धान की पौध तक खोद दे रहे हैं।
- गोपाल सिंह बोरा, दलमोड़ी।
फसलों को नुकसान पहुंचाने के साथ ही बंदर घरों के भीतर तक घुस कर सामान उठा ले जा रहे हैं। पिछले दिनों बंदरों ने एक वृद्धा को घायल कर दिया था। बंदर और सुअर फसलों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। इनसे निजात दिलाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं हो रही है।
- जीवन सिंह बोरा, जैंचोली।
सरकार खेती से ग्रामीणों से आत्मनिर्भर बनने की बात कह रही है, लेकिन सुअरों और बंदरों से छुटकारा दिलाने में सरकार और संबंधित विभाग नाकाम साबित हो रहे हैं। इस कारण किसानों ने सीमित क्षेत्र में खेती करना शुरू कर दिया है, लेकिन वहां भी जंगली जानवर फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
- दलीप सिंह बोरा, दलमोड़ी।
नुकसान के डर से किसानों का खेती से रुझान कम हो रहा है। किसान मेहनत कर फसल उगाता है और बंदर, सुअरों के झुंड फसलों को चौपट कर देते हैं। बरसात के मौसम में घरेलू उपयोग के बाद सब्जी की बिक्री बाजार में करते थे, लेकिन पिछले कुछ सालों से सब्जी बाजार से खरीदनी पड़ रही है।
- खीम सिंह बोरा, जैंचोली।