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सूखती धान की पौध देखकर चौखुटिया के किसानों के माथे पर पड़ जाते हैं बल

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चौखुटिया (अल्मोड़ा)। ऐन रोपाई के समय सिंचाई नहरों में पानी न होने से काश्तकारों के सामने गंभीर समस्या पैदा हो गई है। किसानों की धान की पौध सूखने की कगार पर है। इससे आक्रोशित तल्ली गेवाड़ के भगोती, पटलगांव, जेठुआ आदि ग्राम पंचायतों के किसानों ने सिंचाई कार्यालय का घेराव किया। उन्होंने व्यवस्था में शीघ्र सुधार न होने पर तालाबंदी के साथ उग्र आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है।
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कृषि प्रधान चौखुटिया घाटी में रोपाई का सीजन चरम पर है लेकिन सिंचाई नहरें सूखी पड़ी हैं। करीब साढे़ सत्रह किमी लंबी सिंचाई की बाई नहर से ग्राम चौना तक सिंचाई होनी थी परंतु नहर का पानी अब तक पांच किलोमीटर से नीचे के क्षेत्रों में नही पहुंच पाया है। लगातार गुहार लगाने के बावजूद कार्रवाई न किए जाने से आक्रोशित ग्राम पंचायत ग्रामीणों ने जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया। सिंचाई कार्यालय का घेराव ग्रामीणों ने जेई मनोज जोशी को खरी-खरी सुनाई। जेई ने शनिवार तक भगोती में पानी पहुंचाने का आश्वासन दिया है। विरोध जताने वालों में भगोती के प्रधान हेम चंद्र जोशी, पटलगांव के प्रधान शंकर सिंह, चंदन सिंह बिष्ट, दयासागर, कमला देवी, गणेश वैला, राजू शास्त्री, प्रकाश सिंह आदि शामिल थे।
ग्रामीणों के समर्थन में पहुंचे उपपा के केंद्रीय अध्यक्ष पीसी तिवारी ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर रोष जताया है। उन्होंने बाद में इस संबंध में डीएम से फोन पर बात कर समस्या के तुरंत निदान की मांग की।
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... तो हर साल क्यों की जा रही करोड़ों की बर्बादी
चौखुटिया (अल्मोड़ा)। साढ़े सत्रह किमी लंबी नहर में चौना तक पानी पहुंचना है लेकिन जब पानी पांच किमी से आगे ही नही पहुंच पा रहा है तो चौना तक पानी पहुंचने की कल्पना करना बेकार है। यदि विभाग भगोती तक किसी तरह पानी पहुंचा भी देता है तो उससे आगे की ग्राम पंचायतों में सिंचाई का क्या होगा यह एक ऐसा सवाल है जिसने कृषकों के माथे पर बल ला दिया है। लोगों का कहना है कि जब सिंचाई होनी ही नही है तो फिर नहरों की मरम्मत के नाम पर हर साल करोड़ों की राशि क्यों बर्बाद की जा रही है।
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