ेहूं और जौं के बीजों का विमोचन करते संस्थान निदेशक तथा अन्य अतिथिगण।
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अल्मोड़ा। विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के प्रयोगात्मक प्रक्षेत्र हवालबाग में आयोजित रबी किसान मेले में गेहूं की वीएल 967 एवं जौं की वीएल जौ 130 का विमोचन किया गया। इस मौके पर प्रगतिशील किसानों को सम्मानित करने के साथ अनुसूचित जाति उप परियोजना के तहत विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे किसान समूहों के लिए संस्थान द्वारा विकसित विवेक मंडुवा थ्रैशर कम पर्लर का वितरण भी किया गया। संस्थान के निदेशक डॉ. अरुणव पटनायक ने संस्थान द्वारा किए जा रहे शोध कार्यों की जानकारी देते हुए कहा कि प्रदेश के विकास के लिए किसानों का आर्थिक रूप से मजबूत होना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि किसानों की सुविधा के लिए संस्थान ने कृषि एवं इससे जुड़े अन्य विभागों को एक स्थान पर लाकर कृषि मेला आयोजित किया है। जहां से जानकारी लेकर किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं। उन्होंने किसानों से संस्थान के स्टॉल में उपलब्ध बीजों का प्रयोग करने को कहा।
उन्होंने बताया कि संस्थान द्वारा अंगीकृत एग्री केनन गन द्वारा बंदरों से निजात पाने में सफलता मिली है और इसे ग्रामीण स्तर पर अपनाए जाने की जरूरत है। जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी संस्थान के निदेशक डॉ. आरएस रावल ने पर्वतीय क्षेत्रों में परंपरागत फसल प्रजातियों के संरक्षण के लिए कार्य करने पर जोर देते हुए कहा कि संस्थान पर्वतीय कृषि की उन्नति के लिए अहम भूमिका निभा रहा है। मुख्य कृषि अधिकारी प्रियंका सिंह ने किसानों के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी दी।
केंद्रीय शीतोष्ण बागवानी संस्थान के प्रभारी डॉ. राज नारायण ने शीतोष्ण फलों एवं सब्जियों की खेती के बारे में जानकारी दी। संस्थान के पूर्व निदेशक डॉ. जेसी भट्ट ने भी विचार रखे। फसल सुधार विभाग के प्रभागाध्यक्ष डॉ. लक्ष्मी कांत ने बताया कि 95 सालों से संस्थान 17 प्रमुख फसलों पर कार्य कर रहा है और अभी तक 158 प्रजातियों का विमोचन किया जा चुका है।
किसान मेले में कृषि अनुसंधान परिषद के संस्थानों, कृषि विज्ञान केंद्रों एवं सरकारी तथा गैर सरकारी संस्थानों द्वारा प्रदर्शनियां लगाई गई थीं। संचालन डॉ. निर्मल चंद्रा और डॉ. कुशाग्रा जोशी ने किया और डॉ. जेके. बिष्ट सभी का आभार जताया।