सोमेश्वर (अल्मोड़ा)। आलू उत्पादन के लिए मशहूर सोमेश्वरघाटी में अब किसानों का आलू की खेती से मोह भंग हो गया है। इसकी वजह बंदरों व जंगली सुअर हैं, जो किसानों की मेहनत पर पानी फेर रहे हैं। इस कारण किसानों ने आलू की बुवाई कम की। इससे आलू उत्पादन गिर गया है।
सोमेश्वरघाटी में पहले 80 हेक्टेयर में आलू की बुवाई होती थी। यहां का आलू काफी प्रसिद्ध था। आलू के सीजन में यहां 300 मीट्रिक टन आलू का उत्पादन होता था। जंगली जानवरों के कारण आलू का रकबा कम हो गया है।
अब घाटी में मात्र 15 से 20 हेक्टेयर ही आलू की बुवाई हो रही है। क्षेत्र के सोमेश्वर, चनौदा, ढौनीगाड़, बैंगनिया, भैसड़गांव, रनमन, टाना, सजोली, नारटोली, रेत, सर्प, माला, अधुरिया, दियारी, लोद, खाड़ी आदि दर्जनों गांव में आलू का बहुतायत मात्रा में उत्पादन होता था। अब जंगली जानवर और सिंचाई के कारण लोगों ने आलू की बुवाई कम कर दी है।