भतरौंजखान (अल्मोड़ा)। ग्रामीण क्षेत्रों में फलों के काश्तकारों को बाजार नहीं मिल पा रहा है। सर्दियों के मौसम में होने वाला माल्टा के खरीदार नहीं मिलने से काश्तकार मायूस हैं। काश्तकारों का माल्टा 20 रुपये प्रतिकिलो भी नहीं बिक रहे हैं। संतरे की प्रजाति के माल्टा फलों में विटामिन-सी भरपूर होता है। शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, त्वचा को स्वस्थ रखने और शरीर को एंटीऑक्सीडेंट्स प्रदान करने वाला यह फल शरीर के लिए बहुत ही पौष्टिक होता है। काश्तकार मोहनी देवी का कहना है कि माल्टा तोड़ने से लेकर बाजार तक पहुंचाने में उनका लगभग 20 रुपये प्रति किलो का खर्चा आता है जबकि माल्टा 20 रुपये प्रति किलो भी नहीं बिक रहा हैं। इससे वह मायूस हैं। सरकार को माल्टा के काश्तकारों के लिए बाजार उपलब्ध कराना चाहिए। संवाद