बाजार में सब्जी बेचते काश्तकार
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बौरारो घाटी क्षेत्र में सुअरों और बंदरों द्वारा फसल को नुकसान पहुंचाने से काश्तकार सब्जी उत्पादन से भी कतराने लगे हैं। इसका असर गगास घाटी के मकड़ों गांव से प्याज की पौध बेचने आ रहे कातश्कारों पर भी पड़ रहा है। मकड़ों के काश्तकार जहां पूर्व में इस सीजन में तीस हजार रुपए तक की प्याज की पौध बेच लेते थे, लेकिन अब काफी कम बिक्री हो रही है।
बौरारो घाटी के काश्तकार चावल गेहूं, गडेरी, आलू समेत अन्य सब्जियों का उत्पादन करते हैं, लेकिन पिछले कई सालों से जंगली सुअर और बंदर फसल को चौपट कर दे रहे हैं। इस कारण काश्तकार खेती से विमुख होने लगे हैं। सूअरों के भय से काश्तकार अपने घर के पास के खेतों में ही सब्जी उत्पादन कर रहे हैं।
वर्तमान में प्याज की पौध लगाने का सीजन शुरू हो गया है। गगास घाटी के मकड़ों क्षेत्र से हर वर्ष काश्तकार सोमेश्वर चौराहे पर प्याज की पौध बेचने आते हैं पर बौरारो घाटी क्षेत्र में सुअर और बंदरों द्वारा फसल को पहुंचाए जा रहे नुकसान से काश्तकार सीमित क्षेत्र में खेती कर रहे हैं। इसका असर मकड़ों के प्याज पौध बेचने वालों पर भी पड़ा है।