फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दुश्वारियों को आईना दिखा रही हैं गगास घाटी की मेहनतकश महिलाएं

विज्ञापन
विज्ञापन
रानीखेत (अल्मोड़ा)। तमाम तरह की दुश्वारियों को गगास घाटी की महिलाएं ठेंगा दिखा रही हैं। बंदरों, सुअरों के आतंक से एक तरफ लोग खेती से विमुख हो रहे हैं तो दूसरी तरफ गगास घाटी की कर्मठ महिलाओं ने सब्जी उत्पादन को जीविकोपार्जन का जरिया बनाया है। इन दिनों हरी सब्जी का सीजन है। घाटी में मेहनतकश महिलाओं की जीवटता के चलते अच्छी सब्जी का उत्पादन हुआ। तड़के महिलाएं सब्जियां बेचने बाजार पहुंच जाती हैं। लोग ताजी हरी सब्जियों को हाथों हाथ ले रहे हैं।
विज्ञापन

पहाड़ में अब खेती किसानी करना पहले जैसा आसान नहीं है। बंदरों, सुअरों का आतंक इस कदर बढ़ गया है, लोग खेतीबाड़ी से विमुख हो रहे हैं। लेकिन उपजाऊ गगास घाटी के किसानों ने हिम्मत नहीं हारी है। यहां की महिलाएं बारी-बारी खेतों में पहरा देकर सब्जियों का उत्पादन करती हैं। घाटी के किसान प्याज की पौध, शिमला मिर्च, आलू, मटर, आलू, मटर, गडेरी, लहसुन, धनिया, अदरक, पालक, लाही, मूली, शलजम आदि का उत्पादन करते हैं। घाटी के प्याज की पौध पूरे प्रदेश में प्रसिद्ध है। सब्जियों का विपणन भी किसान स्वयं करते हैं। सुबह महिलाएं सिरों पर डलिया रखकर सब्जी बेचने के लिए 25 से 30 किमी दूर रानीखेत पहुंचती हैं। किसान कृषि उत्पादों को बचेने के लिए रानीखेत, सोमेश्वर, गरुड़, द्वाराहाट, चौखुटिया, गैरसैंण, कर्णप्रयाग तक जाते हैं। फसल बचाने के लिए महिलाएं स्वयं ही खेतों में बारी-बारी से पहरा देती हैं। सिंचाई के लिए पुराने पारंपरिक जलस्रोतों को संरक्षित किया गया है।
सरकार से मदद की दरकार
रानीखेत। गगास घाटी के ग्राम मकड़ों, मंगचौड़ा, मटेला, मौना, नागुली, चौकुनी, कोट्यूड़ा, चमना, बिष्ट कोटली, मनेला, पिनोली में हरी सब्जियों का उत्पादन बहुतायत में होता है। पूर्व जिला पंचायत सदस्य राजेंद्र बिष्ट ने बताया कि यदि किसानों को सरकार की तरफ से मदद मिले तो गगास घाटी के लोग सब्जी उत्पादन के माध्यम से ही आत्मनिर्भर हो सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें