जीबी पंत हिमालय पर्यावरण एवं विकास संस्थान कटारमल में तीन सप्ताह से चल रही ‘रीजनल इनोवेशन सांइस हब फॉर इनोवेटर’ कार्यशाला का समापन हो गया है। प्रतिभागियों ने दूषित जल का सिंचाई के लिए उपयोग, भू-जल स्तर बढ़ाने को जल संग्रहण, प्लास्टिक अपशिष्ट से ईंट निर्माण आदि विचारों का वैज्ञानिक प्रस्तुतिकरण किया। संस्थान के निदेशक डा. पीपी ध्यानी ने प्रतिभागियों से सीखे गए विचारों को कार्यरूप में उतारने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा वैज्ञानिक सोच से ही समाज के लिए उपयोगी तकनीक हासिल की जा सकती है। कल्पना को वैज्ञानिक कसौटी पर उतारने के लिए युवा आगे आएं। उन्होंने कार्यशाला में छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत विचारों की सराहना की और कार्यशाला में उपयुक्त पाए गए प्रस्तावों को आगे बढ़ाने का भरोसा दिया। वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. जीसीएस नेगी ने प्रतिभागियों द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों को उपयोगी बताते हुए उन्हें व्यवहार में उतारने का आह्वान किया।
विशेष परामर्शदाता वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. आईडी भट्ट, डा. सुब्रत शर्मा, डा. अरुण जुगरान, डा. आशीष पांडे ने प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया। संयोजक डा. आरएस रावल ने छात्र-छात्राओं से संस्थान से निरंतर संपर्क बनाए रखने को कहा, ताकि वैज्ञानिक उनका मार्गदर्शन कर सकें। तीन बैचों में चली कार्यशाला में राज्य के दस जिलों से 50 विद्यार्थियों ने भाग लिया। समापन अवसर पर शोधार्थी भावना कपकोटर, प्रवीण ध्यानी, अमित बहुखंडी, भास्कर जोशी, मीनाक्षी नेगी, रेनू सुयाल, शशि उपाध्याय, गीतांजलि भाकुनी, मोनिका बिष्ट, कुलदीप जोशी आदि मौजूद थे।