जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालय पर्यावरण संस्थान में चल रही नेशनल मिशन आफ हिमालयन स्टीज परियोजना के तहत चीड़ की पत्तियों (पिरुल) का उपयोग कर जैविक ईंधन (बायोब्रिकेट्स) तैयार कर ग्रामीणों को आजीविका से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैैं। पिरुल से ईंधन तैयार करने के लिए हवालबाग ब्लॉक के आठ गांवों में ग्रामीणों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अब तक 40 परिवारों को इससे जोड़ा जा चुका है।
परियोजना अधिकारी डा. डीएस रावत ने बताया कि कोयला तैयार करने के लिए संस्थान प्रत्येक गांव में सांचा उपलब्ध करा रहा है। भविष्य मे पिरुल से जैविक ईंधन तैयार करने के अलावा अन्य उत्पाद फाइल, लिफाफे, आकर्षक कलाकृतियां, गुलदस्ते आदि बनाने का भी कार्य किया जाएगा। इसके लिए संस्थान के ग्रामीण तकनीकी परिसर में इकाई स्थापित की जा रही है।
ग्रामीणों द्वारा पिरुल से तैयार कोयला शहर में मिलना उपलब्ध हो गया है।
इससे महिला हाट संस्था चौघानपाटा को जोड़ा गया है जो कि शहर में पिरुल का कोयला उपलब्ध करा रही है। सर्दी से बचने के लिए पिरुल का कोयला काफी उपयोगी है। पिरुल के कोयले से आग सेंकने के साथ ही खाना भी बनाया जा सकता है। जो हीटर और मिट्टी तेल के स्टोब से सस्ता पड़ता है। इससे ग्रामीणों को रोजगार मिल रहा है वहीं प्रतिवर्ष वनाग्नि से होने वाली क्षति को भी रोकने में सहायता मिलेगी।