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 प्राण चिकित्सा विधि से उपचार करने के तरीके बताए

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प्राण चिकित्सा पद्धति का प्रतिभागियों को अभ्यास कराते प्रशिक्षक। - फोटो : amar ujala
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 एसएसजे परिसर अल्मोड़ा के योग शिक्षा विभाग की ओर से योग विभाग में वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों का चिकित्सकीय अनुप्रयोग विषय पर आयोजित दस दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में चौथे दिन प्राण चिकित्सा के बारे में जानकारी दी गई। विशेषज्ञ ऊषा जायसवाल ने बताया कि प्राण चिकित्सा शरीर के 11 चक्रों पर आधारित है। 

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उन्होंने बताया कि इस पद्धति के अनुसार मानव शरीर चक्रों से संचालित होता है। चक्र ऊर्जा केंद्र होते हैं जो प्राण शक्ति को शरीर के विभिन्न भागों तक पहुंचाते हैं। इस चिकित्सा में उपचारक अपने हाथों के माध्यम से ब्रह्मांडीय प्राण ऊर्जा को ग्रहण कर हाथों द्वारा रोगी से ऊर्जा प्रक्षेपित करता है।

यह उपचार पद्धति रोग से स्व मुक्ति और प्राण ऊर्जा के सिद्धांत पर आधारित है। प्रतिभागियों को प्राण चिकित्सा द्वारा जोड़ों का दर्द, गर्दन दर्द, ऐंठन, मधुमेय, नेत्र रोग, कमर दर्द समेत कई रोगों में चिकित्सा करने की विधियों से दक्ष किया जा रहा है। योग विभागाध्यक्ष डॉ. नवीन चंद्र भट्ट ने बताया कि 18 अप्रैल को रोगियों का प्राण चिकित्सा द्वारा उपचार किया जाएगा। कार्यशाला में राकेश जायसवाल, डॉ. प्रेम प्रकाश पांडेय, डॉ. लल्लन कुमार सिंह, डॉ. आशा राणा, हेमलता अवस्थी, मोनिका भैसोड़ा, हिमानी दानू, नेहा बिष्ट, ज्योति चुफाल, ललित मोहन जोशी, हिमांशी जोशी, सुमित चौधरी, गिरीश अधिकारी, संदीप नयाल आदि मौजूद थे।

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