पिछले पांच साल संघर्ष कर रही तनुजा बुधवार को वैवाहिक बंधन में बंध गई। अब उस पर दोहरी जिम्मेदारी है। कारण, उसने ससुराल की जिम्मेदारी निभाने के साथ-साथ मायके में दादा, भाई और बहन की परवरिश करते रहने का निर्णय लिया है। समाज के सामने मिसाल पेश करने वाली तनुजा का कहना है कि दुश्वारियों ने उसे जीना सिखाया है, नारी के कमजोर होने की धारणा को खारिज करना चाहती है।
पांच साल पहले जिले की सीमा से लगे गरमपानी जज्यूला गांव की कर्मठ तनुजा के सिर से माता-पिता का साया हट गया था। तब 91 वर्षीय दादा रेबाधर फुलारा, दो नाबालिग भाई-बहनों की जिम्मेदारी 16 वर्ष की तनुजा के कंधों पर आ गई। फिर भी तनुजा ने हिम्मत नहीं हारी। खेतीबाड़ी समेत पास के एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाकर भाई-बहनों की फीस जुटाई। 91 वर्षीय दादा का भी भरण-पोषण किया।
तनुजा ने अपनी भी पढ़ाई जारी रखी। अब उसके दादा की उम्र 96 साल है जबकि भाई 11वीं में और बहन छठी कक्षा में पढ़ रही है। बुधवार को तनुजा की शादी बुदलाकोट गांव निवासी तारा चंद्र के साथ हो गई। तनुजा का कहना है कि वैवाहिक जीवन के साथ ही दादा, भाई बहन की जिम्मेदारी भी निभाती रहेगी। पति तारा चंद्र दुग्ध विभाग भीमताल में कार्यरत हैं।
तनुजा का कहना है कि संकट ने उन्हें जीना सिखाया है। वह नारी के कमजोर होने की धारणा को ही खारिज करना चाहती हैं। साहसी तनुजा के इस निर्णय से ग्रामीणों में खुशी है, उनका कहना है कि इस तरह का जज्बा बिरले लोगों के पास होता है। अब शादी के बाद भी परवरिश करते रहने का निर्णय लेकर तनुजा ने अच्छा काम किया है।
तनुजा के रिश्तेदार धारड़ भतरौंजखान के रंगकर्मी गायक शिव दत्त पंत ने बताया कि तनुजा के साहस, त्याग से प्रभावित होकर दुबई स्थित उत्तराखंड एसोसिएशन से संबद्ध कत्यूर संस्था की तरफ से देवेंद्र कोरंगा ने तनुजा की शादी के लिए 25 हजार की मदद दी है। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी सहयोग का भरोसा दिलाया है।