चौखुटिया (अल्मोड़ा)। प्रदेश सरकार एक तरफ गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के दावे कर रही है। वहीं जमीनी हकीकत कुछ अलग ही बयां कर रही है। अल्मोड़ा जिले के चौखुटिया ब्लॉक का ग्राम पंचायत नौगांव अखोड़िय का तोक बसेगाड़ सड़क सुविधा से नहीं जुड़ सका है। यहां के ग्रामीण घायलों और गर्भवतियों को बदहाल रास्तों के बीच एक किमी से अधिक की दूरी पैदल तय कर डोली के सहारे मुख्य सड़क तक पहुंचाते हैं।
राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने पर प्रदेश सरकार रजत जयंती के रूप में मना रही है। चौखुटिया ब्लॉक का ग्राम पंचायत नौगांव अखोड़िय का तोक बसेगाड़ सड़क सुविधा विहीन है। बसेगाड़, भटयाण, दलामाड, डबरिया, पटीगाड़ और दानपुर तोक में लगभग 500 लोग रहते हैं। गांव में किसी के घायलों या गर्भवतियों को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों के पास सिर्फ डोली का ही सहारा है। ग्रामीणों को खाद्य सामग्री सहित अन्य जरूरत के सामान के लिए अतिरिक्त धन खर्च करना पड़ता है। गांव और मुख्य सड़क की दूरी ज्यादा होने के कारण आवाजाही के दौरान ग्रामीणों के लिए रास्तों में जानवरों का भय बना रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि वह वर्षों से सड़क निर्माण की मांग को लेकर लगातार प्रयास कर रहे हैं। बावजूद इसके शासन प्रशासन ने आज तक उनकी मांग पूरी की। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि उनकी समस्याओं का समाधान जल्द नहीं हुआ तो सभी ग्रामीणों आंदोलन करने को बाध्य होंगे। संवाद
वर्जन :
चुनाव प्रचार के समय उम्मीदवार गांव पहुंचकर घर-घर में वादे कर जाते हैं लेकिन चुनाव जीतने के बाद उन्हें गांव और ग्रामीणों की याद तक नहीं रहती। - रमेश नेगी, ग्रामीण।
- बमनगांव तक रोड का सर्वे तो हुआ है, लेकिन वन विभाग की आपत्ति के कारण आज तक आगे का कार्य नहीं हो पाया है जबकि बसेगाड़ वहां से लगभग 600 मीटर दूर है। - विपिन चंद्र, ग्राम प्रधान, बामनगांव।
बसेगाड़ तक रोड पहुंचना उनका प्राथमिक लक्ष्य है और इसके लिए वो पूरा प्रयास करेंगी।- चंपा देवी, ग्राम प्रधान, नौगांव अखोड़िय।
- जहां सरकार एक तरफ देशभर में सड़कों का जाल बिछा रही है। वहीं बसेगाड़ सड़क स्वीकृत नहीं हो पाई है। उन्होंने कहा कि अगर सड़क को स्वीकृत नहीं मिलेगी तो वह ग्रामीणों के साथ आंदोलन करेंगे। हीरा नेगी, सामाजिक कार्यकर्ता।
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-अपने कार्यकाल में बसेगाड़ तक रोड निर्माण के लिए क्षेत्र पंचायत की मीटिंग कर कई बार आवाज उठाई थी। तब शासन-प्रशासन किसी की नहीं सुनी। - मनीषा बिष्ट, पूर्व प्रधान।