उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी संगठन ने विभिन्न मांगों को लेकर कलक्ट्रेट में धरना दिया। इस मौके पर हुई सभा में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार स्थायी राजधानी का मुद्दा अभी तक नहीं सुलझा पाई है। प्रदेश में अपराध और भ्रष्टाचार का ग्राफ काफी बढ़ गया है, लेकिन सरकार इस पर भी अंकुश नहीं लगा सकी है। वक्ताओं ने राज्य आंदोलनकारियों की विभिन्न समस्याओं का जल्द निराकरण करने की मांग प्रदेश सरकार से की।
जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर धरना देते हुए राज्य आंदोलनकारियों ने प्रदेश सरकार से गैरसैंण को राज्य की राजधानी घोषित करने की मांग की। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि राजधानी के नाम पर सरकार सिर्फ बरगलाने का काम कर रही है। कानून व्यवस्था लचर होने के कारण प्रदेश में आए दिन अपराध बढ़ रहे हैं और भ्रष्टाचारी बेलगाम हैं। संगठन के संयोजक महेश परिहार ने राज्य आंदोलनकारियों की समस्याओं का भी निराकरण नहीं होने पर नाराजगी व्यक्त की।
उन्होंने प्रदेश सरकार से आंदोलनकारियों के दो बच्चों को कुमाऊं और गढ़वाल विश्वविद्यालय समेत तकनीकी संस्थानों में प्रवेश में छूट देने और शिक्षा के साथ नौकरी के लिए आरक्षण की व्यवस्था करने की मांग की है। उन्होंने राज्य आंदोलनकारियों को नौकरी के लिए आरक्षण की व्यवस्था बहाल करने, चिन्हित आंदोलनकारियों को पेंशन देने और जेल में बंद रहे आंदोलनकारियों को आर्थिक सहायता और विशेष पेंशन देने की भी मांग की है।
वक्ताओं ने राज्य परिवहन निगम की बसों में नि:शुल्क यात्रा सुविधा देने और राजकीय कार्यक्रमों में उनको भी आमंत्रित करने की मांग की। धरने पर विश्वंभर दत्त पेटशाली, हेम चंद्र जोशी, गोविंद राम, कैलाश राम, तारा राम, खड़क राम, दौलत सिंह, सुंदर राम, अर्जुन सिंह, एलडी शर्मा, बसंत जोशी, शिवराज सिंह बनौला, मदन राम, रमेश सिंह बनौला, कुंदन सिंह आदि शामिल थेे।