कर्मचारियों का मानसिक उत्पीड़न करने, अव्यवहारिक कार्य प्रणाली और श्रमिकों के पारिश्रमिक का भुगतान नहीं करने का आरोप लगाते हुए वन विभाग के कर्मचारियों ने डीएफओ पंकज कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को प्रभागीय वनाधिकारी कार्यालय परिसर में आपात बैठक कर कर्मचारियों ने 26 नवंबर तक डीएफओ का स्थानांतरण नहीं होने पर प्रभागीय वनाधिकारी के अधीन कार्य नहीं करने का एलान किया है। कर्मचारियों ने प्रमुख वन संरक्षक को भी इस संबंध में ज्ञापन भेजा है। बैठक के दौरान कर्मचारियों डीएफओ के खिलाफ नारेबाजी भी की।
उत्तरांचल फारेस्ट मिनिस्ट्रीयल जिला शाखा के तहत कर्मचारियों ने शुक्रवार दिन में प्रभागीय वनाधिकारी परिसर में आपातकालीन बैठक की। उन्होंने ने आरोप लगाया कि डीएफओ द्वारा कर्मचारियों का लगातार मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा है। उनके द्वारा डाक में नियमित हस्ताक्षर भी नहीं किए जाते हैं। उन्होंने बताया कि डीएफओ का अधिकांश समय कर्मचारियों को चेतावनी देने उनका स्पष्टीकरण लेने में ही व्यतीत हो जाता है। इसके अलावा श्रमिकों का एक साल से पारिश्रमिक का भुगतान भी नहीं किया गया है। कर्मचारियों ने उनके साथ काम करने में असहमति जताते हुए डीएफओ को कुमाऊं मंडल से बाहर स्थानांतरित करने की मांग की। कर्मचारियों ने ऐसा नहीं होने पर 26 नवंबर से वन संरक्षक उत्तरी कुमाऊं में बैठकर काम करने की चेतावनी दी। कर्मचारियों ने मांग पूरी नहीं होने पर प्रदेश स्तर पर आंदोलन छेड़ने की चेतावनी दी। बैठक के दौरान सड़क पर वाहन में बैठकर जा रहे वनाधिकारी के खिलाफ कर्मचारियों ने नारेबाजी भी की।
इस मौके पर एसोसिएशन जिलाध्यक्ष सुरेश जोशी, मंत्री धनराज सिंह रौतेला, मुख्य संरक्षक महेंद्र वर्मा, तृप्ता पंत, तारा चंद्र सिंह परिहार, नवीन तिवारी, उमापति भट्ट, कमलेश जोशी, कमल कुमार, गोपाल भट्ट, अंकित दुम्का, हीरा सिंह, कविता नयाल, कलावती भाकुनी, विमला देवी, सुंदर सिंह, मनीष जोशी, प्रशासनिक अधिकारी श्याम सिंह रावत, महेंद्र सिंह बिष्ट, दीप तिवारी, इंद्र सिंह, दिनेश तिवारी, गरिमा तिवारी, मनोज पांडे, मुकेश तिवारी, शिवानी चौहान, दिनेश दुर्गापाल, कृपाल राम, जगत सिंह, नारायण रावत, नरेंद्र गुसाई, पार्वती नयाल, निर्मला देवी आदि शामिल थे।
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