आजादी के कई सालों बाद भी लमगड़ा विकासखंड मुख्यालय में बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। यहां न तो पार्क है और न ही यात्री प्रतीक्षालय। जीर्ण-शीर्ण सार्वजनिक शौचालय में गंदगी का अंबार लगा है। लमगड़ा विकासखंड मुख्यालय1981 में अस्तित्व में आया। विकासखंड के अंतर्गत 103 ग्राम पंचायतें हैं। लमगड़ा कस्बा दर्जनों गांवों का मुख्य बाजार भी है। ब्लॉक में आबादी तेजी से बढ़ रही है, लेकिन ब्लॉक मुख्यालय में सुविधाओं का अभाव है। विकासखंड मुख्यालय में पार्क तक नहीं है, जिससे बच्चों को खेलने के लिए स्थान नहीं मिल पाता है। साथ ही आम लोगों के विश्राम करने के लिए भी कोई जगह नहीं है।
लमगड़ा से शहरफाटक, हल्द्वानी, बमनस्वाल, धौलादेवी, दुबरौली, चेलनीछीना, चायखान, बचकांडे, धारखोला, जैंती समेत कई स्थानों को प्रतिदिन सैकड़ों वाहन गुजरते हैं। कस्बे में यात्रियों और पर्यटकों की काफी भीड़ रहती है, लेकिन आज तक यात्री प्रतीक्षालय तक नहीं बन सका है। यात्रियों को सड़क किनारे खड़े होकर वाहनों का इंतजार करना पड़ता है।
लंबे समय से कई स्थानों पर कल्वर्ट और नालियां बंद पड़ी हैं, गंदा पानी सड़कों में बह रहा है। नालियों में गंदा पानी एकत्रित रहने सेे काफी दुर्गंध आती है, जिससे आसपास के व्यापारियों, स्कूली बच्चों, राहगीरों और पर्यटकों को भारी दिक्कत होती है। व्यापार मंडल लमगड़ा के पूर्व उपाध्यक्ष हरीश कपकोटी और कनिष्ठ सचिव देवेंद्र सिंह रौतेला का कहना है कि राज्य बनने के बाद कई सरकारें आई और गईं, लेकिन किसी ने भी कस्बे की समस्याओं का समाधान नहीं किया। उन्होंने ब्लॉक मुख्यालय में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।