कत्यूरों की राजधानी तैलीहाट गांव का विहंगम दृश्य
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गरुड़ (बागेश्वर)। कत्यूरी शासकों की राजधानी रहे तैलीहाट गांव को आज तक सड़क से नहीं जोड़ा गया है। यह बात ग्रामीणों के गले से नीचे नहीं उतर रही है। जबकि सरकार पीएमजीएसवाई के तहत हर गांव को सड़क से जोड़ने का कई सालों से ढोल पीटते आ रही है।
कत्यूरी शासन करीब 850 ईसवी से शुरू हुआ था। उन्होंने तैलीहाट गांव को राजधानी बनाया था जिसके अवशेष आज भी सुरक्षित हैं। इतिहास
के जानकारों के अनुसार कत्यूरों की राजधानी पहले जोशीमठ हुआ करती था। राजा आसंति देव के समय राजधानी को कत्यूरों ने तैलीहाट (बैजनाथ) स्थानांतरित कर दिया था। तैलीहाट विकास खंड का सबसे प्राचीन गांव है। आजादी से पहले गांव की आबादी करीब 95 थी जो वर्तमान में 533 है। गांव की अधिकांश जमीन सिंचित होने से यहां पर पलायन काफी कम है। भाजपा के प्रदेश संगठन मंत्री पुष्कर काला भी इसी गांव के हैं। ग्रामीण गांव को सड़क से जोड़ने की मांग करते करते थक गए हैं।
क्या कहते हैं लोग
तैलीहाट गांव को सड़क से जोड़ने के संबंध में मैंने कई बार विधायक चंदन राम दास और डीएम से कहा। लोनिवि ने आज तक प्रस्तावित मोटर मार्ग का सर्वे तक नहीं किया है। जबकि ग्रामीण सड़क के लिए जमीन देेने को भी तैयार हैं। सड़क न होने से गर्भवती महिलाओं और बीमारों को अस्पताल ले जाने में बहुत परेशानी होती है। - मंजू रावत, बीडीसी सदस्य, तैलीहाट
तैलीहाट गांव को सड़क से जोड़ने के संबंध में मैंने 1952 में अविभाजित उप्र के पहले मुख्यमंत्री गोविंद बल्लभ पंत को अल्मोड़ा रैमजे इंटर कॉलेज में एक पत्र दिया था। अब उम्मीद नहीं है कि मै गांव में गाड़ी देख पाऊंगा। - प्रताप सिंह रौतेला (102), तैलीहाट गांव के सबसे बुजुर्ग व्यक्ति।
तैलीहाट का सत्यनारायण मंदिर ऐतिहासिक धरोहर है। मंदिर को देखने देश विदेश से सैकड़ों पर्यटक हर साल बैजनाथ तक आते हैं। गांव में सड़क न होने से बुजुर्ग मंदिर के दर्शन नहीं कर पाते है। - कला जोशी, सत्यानाराण मंदिर की प्रधान पुजारी।