सोशल मीडिया, व्हाट्सएप और फेसबुक बने प्रचार की पसंद, प्रिंटिंग कारोबार पर छाने लगी मंदी के बादल
रानीखेत (अल्मोड़ा)। जिले में पंचायत चुनाव प्रचार का रूप तेजी से बदल रहा है। गांव-गांव घूमकर पर्चे बांटना, दीवारों पर पोस्टर चिपकाना और बैनर लगवाना अब पुरानी बात हो गई है। सोशल मीडिया, व्हाट्सएप और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म प्रत्याशियों के लिए प्रचार के सबसे कारगर साधन बन गए हैं। खासकर युवा उम्मीदवार इन माध्यमों से सीधे मतदाताओं तक अपनी बात पहुंचा रहे हैं।
वीडियो संदेश, लाइव चैट और डिजिटल पोस्टरों के जरिए अब चुनाव प्रचार सस्ता, प्रभावी और व्यापक हो गया है। इस बदलाव का असर प्रिंटिंग कारोबार पर भी साफ नजर आ रहा है। प्रिंटिंग व्यवसायी सूरज कुमार बताते हैं कि पहले चुनाव के दौरान पोस्टर, पर्चों और बैनरों की भरमार रहती थी, लेकिन अब डिजिटल प्रचार को तरजीह मिलने से कारोबार मंदा हो गया है। वहीं, लगातार हो रही बारिश ने भी कागज आधारित प्रचार सामग्री की मांग को प्रभावित किया है। प्रत्याशी अब प्लास्टिक फ्लेक्स को प्राथमिकता दे रहे हैं, जो बारिश में खराब नहीं होती।