रानीखेत। सड़क हादसे में घायल एक बुजुर्ग को उप जिला चिकित्सालय रानीखेत में सोमवार को 45 मिनट तक स्ट्रेचर नहीं मिला। परिजनों का आरोप है कि इलाज में देरी के कारण बुजुर्ग ने दम तोड़ दिया। देर शाम अस्पताल पहुंचीं संयुक्त मजिस्ट्रेट रानीखेत दीक्षिता जोशी के सामने ग्रामीणों का आक्रोश भी सामने आया। मामले को गंभीरता से लेते हुए एसडीएम रानीखेत ने नायब तहसीलदार राजेंद्र अधिकारी को जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।
मजखाली निवासी पूरन सिंह अधिकारी (65) सोमवार को एक नामकरण समारोह से लौट रहे थे। इसी दौरान बाइक की टक्कर से वह गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोग उन्हें कार से उप जिला चिकित्सालय रानीखेत लेकर पहुंचे। नारायण सिंह, कमल सिंह, मोहन सिंह और हेमंत सिंह आदि ने आरोप लगाया कि स्ट्रेचर के लिए गिड़गिड़ाते रहे। अस्पताल पहुंचने पर घायल को वाहन से अंदर ले जाने के लिए कोई कर्मचारी मदद के लिए नहीं आया।
आपातकालीन चिकित्सा अधिकारी सौरभ ने कहा कि उन्हें स्ट्रेचर नहीं मिलने की कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि परिजनों ने उन्हें मृतक की गंभीर हालत के बारे में नहीं बताया था। परिजनों का कहना है कि अस्पताल में आपात स्थिति में मरीजों को इस तरह इंतजार नहीं कराना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कोई वार्ड बॉय वाहन तक नहीं पहुंचा और घायल को तत्काल अंदर ले जाने की व्यवस्था नहीं हो सकी। करीब 45 मिनट तक स्ट्रेचर नहीं मिलने के कारण पूरन सिंह ने दम तोड़ दिया।
रानीखेत उप जिला चिकित्सालय में बुजुर्ग की मौत के बाद परिजनों ने समय पर स्ट्रेचर नहीं मिलने के आरोप लगाए। मामला संज्ञान में आया है। तथ्यों की जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
-एचसी पंत, सीएमओ, अल्मोड़ा
बाइक चालक को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। परिजनों की तहरीर के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की जाएगी।
-भावना कैंथोला, पुलिस क्षेत्राधिकारी, रानीखेत
सदमे में पत्नी, मजखाली में शोक
मृतक पूरन सिंह के घर पर उनकी पत्नी रहती हैं। उनके दोनों बेटे बाहर रहते हैं। हादसे की सूचना पर पत्नी गहरे सदमे में हैं और मजखाली गांव में माहौल गमगीन है।
पहाड़ के अस्पतालों के इंतजामों पर फिर उठे सवाल
रानीखेत (अल्मोड़ा)। उप जिला चिकित्सालय रानीखेत में सोमवार को सामने आई घटना ने पहाड़ के अस्पतालों के इंतजामों पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मजखाली में सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल बुजुर्ग को अस्पताल पहुंचाने के बाद परिजनों को स्ट्रेचर के लिए इंतजार करना पड़ा। आरोप है कि समय पर स्ट्रेचर और सहायता नहीं मिलने से घायल काफी देर तक वाहन में ही पड़ा रहा। अस्पताल परिसर में कई स्ट्रेचर मौजूद होने के बावजूद जरूरत के वक्त उनका उपयोग नहीं हो सका। कुछ स्ट्रेचर परिसर में पड़े हैं, जबकि कुछ अभी उपयोग शुरू होने के इंतजार में धूल फांक रहे हैं।
ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जब संसाधन अस्पताल में उपलब्ध हैं तो आपात स्थिति में मरीजों को समय पर उनका लाभ क्यों नहीं मिल पा रहा है। गंभीर मरीजों और सड़क हादसों में घायलों के लिए स्ट्रेचर सबसे बुनियादी सुविधा है। ऐसे मरीजों को वाहन से तत्काल उपचार कक्ष तक पहुंचाना जरूरी होता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल संसाधन उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं, बल्कि जरूरत के समय उनका तत्काल उपयोग सुनिश्चित होना भी जरूरी है। लोगों ने अस्पताल प्रशासन से आपातकालीन व्यवस्थाओं की समीक्षा कर प्रवेश द्वार पर स्ट्रेचर और कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की है ताकि भविष्य में किसी मरीज को मदद के इंतजार में कीमती समय न गंवाना पड़े।
सीसीटीवी फुटेज नहीं देखी जा सकी, ग्रामीणों में आक्रोश
रानीखेत (अल्मोड़ा)। उप जिला चिकित्सालय में सड़क हादसे में घायल बुजुर्ग की मौत के मामले में सोमवार देर शाम संयुक्त मजिस्ट्रेट रानीखेत दीक्षिता जोशी ने ग्रामीणों से वार्ता की और अस्पताल पहुंचकर मामले की जानकारी ली। आक्रोशित ग्रामीणों के आरोपों के बाद उन्होंने डॉक्टरों से भी बातचीत की।
डॉक्टरों ने दावा किया कि सूचना मिलने के करीब 10 मिनट बाद वे बाहर पहुंच गए थे, जबकि ग्रामीणों ने इस पर असहमति जताते हुए काफी देर तक डॉक्टर के बाहर नहीं आने का आरोप लगाया। सामाजिक कार्यकर्ता नारायण सिंह अधिकारी ने कहा कि जब तक स्ट्रेचर मिला तब तक बुजुर्ग की मृत्यु हो चुकी थी।
ग्रामीणों ने स्थिति स्पष्ट करने के लिए सीसीटीवी फुटेज देखने की मांग की, लेकिन फुटेज नहीं देखी जा सकी। मामले को गंभीरता से लेते हुए एसडीएम रानीखेत ने नायब तहसीलदार राजेंद्र अधिकारी को जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। इस दौरान ग्रामीणों में नाराजगी देखी गई। वहां प्रधान प्रतिनिधि अरविंद अधिकारी, नारायण सिंह अधिकारी, कमल सिंह, मोहन सिंह, हेमंत सिंह आदि मौजूद रहे।