रानीखेत (अल्मोड़ा)। ताड़ीखेत ब्लाक के सुदूरवर्ती बड़सीला गांव एक बीमार बुजुर्ग ने अस्पताल ले जाने से पहले ही पैदल रास्ते में दम तोड़ दिया। यह गांव सड़क से एक से डेढ़ किमी की दूरी पर बताया जा रहा है, ग्रामीण तबियत खराब होने पर सुबह बुजुर्ग को अस्पताल ले जा रहे थे। लोगों का कहना है कि अगर सड़क रहती तो बुजुर्ग को समय पर उपचार मिल जाता।
एक तरफ गांव-गांव को सड़क सुविधा से जोड़ने के दावे होते हैं, दूसरी तरफ कई गांव आज भी मोटर मार्ग से वंचित हैं। ग्रामीणों को तीन से चार किमी की दूरी तय कर किसी तरह से मुख्य सड़क तक पहुंचना पड़ता है। सुदूरवर्ती काकड़ीघाट स्थित गड़स्यारी का बड़सीला गांव भी अभी तक सड़क से वंचित है। सड़क नहीं होने के कारण इस तोक से पलायन हो चुका है। 20 परिवार रहते हैं, वहां भी अधिकतर बुजुर्ग ही हैं। पूर्व प्रधान धरम सिंह ने बताया कि शुक्रवार सुबह बुजुर्ग 70 वर्षीय रेवाधर पाठक की तबियत अचानक खराब हो गई।
ग्रामीण चादर आदि में रखकर उन्हें अस्पताल के लिए ला रहे, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। वह घर पर अकेले रहते थे। कुछ दिन पहले ही दिल्ली से उपचार कराकर घर लौटे थे। प्रधान गंगा देवी, गड़स्यारी के सामाजिक कार्यकर्ता विशन कनवाल, भुवन चंद्र पांडे सहित तमाम लोगों ने गांव के लिए सड़क बनाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि अगर सड़क होती तो संभवत: बुजुर्ग को समय पर उपचार मिल जाता और उनकी जान बच जाती।
-डोल की धार से बड़सीला के लिए तीन किमी रोड स्वीकृत है, लेकिन वन भूमि का मामला आड़े आ रहा है। इसकी औपचारिकताएं पूरी नहीं हुई है। इसके लिए फिर प्रयास किए जाएंगे।-धन सिंह रावत, जिला पंचायत सदस्य गड़स्यारी।