अल्मोड़ा। प्रदेश में तकनीकी शिक्षा का ज्ञान देकर युवाओं को रोजगार देने के उद्देश्य से खोले गए आईटीआई की हालत ठीक नहीं है। शिक्षकों की कमी के चलते दो दशकों के भीतर 48 आईटीआई पर ताले लटक गए हैं। 16 बंद होने की कगार पर हैं।
राज्य गठन के बाद प्रदेश में 153 आईटीआई का संचालन हुआ, इनमें कुमाऊं के 73 और 80 आईटीआई शामिल हैं। प्रदेश के 15 हजार से अधिक युवा तकनीकी शिक्षा का ज्ञान लेकर रोजगार की उम्मीद में यहां पहुंचते रहे। समय के साथ इनके विस्तार के बजाय विकास के दावों के बीच ये बदहाली का शिकार होते रहे। इनमें पर्याप्त ट्रेड संचालित होने के बाद भी शिक्षकों की तैनाती नहीं हो सकी और धीरे-धीरे विद्यार्थियों ने इन संस्थानों से दूरी बनानी शुरू की।
कागजों में संचालन
दोनों मंडलों में 24-24 आईटीआई बंद हुए हैं। दोनों मंडलों में 8-8 ऐसे आईटीआई हैं जिनका सरकारी फाइलों में तो संचालन हो रहा है, लेकिन यहां न तो शिक्षक हैं और न ही विद्यार्थियों की चहलकदमी। ऐसे में इन आईटीआई में भी कभी भी ताले लटक सकते हैं।
यह भी जानें
-प्रशिक्षण एवं सेवायोजन निदेशालय से मिली जानकारी के अनुसार प्रदेश में खोले गए सभी आईटीआई के कुशल संचालन के लिए 1386 शिक्षकों की जरूरत थी लेकिन इसके सापेक्ष वर्तमान में महज 639 शिक्षक तैनात हैं और 747 पद रिक्त हैं।
शिक्षकों की तैनाती न होने से आईटीआई का संचालन बंद करना पड़ा। इनके संचालन के लिए शिक्षकों की तैनाती जरूरी है, इसके प्रयास हो रहे हैं।
-राजेंद्र सिंह मर्तोलिया, सहायक निदेशक, प्रशिक्षण एवं सेवायोजन निदेशालय, हल्द्वानी, नैनीताल।