धारे से पानी ले जातीं महिलाएं।
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गर्मी बढ़ने के साथ ही क्षेत्र में पेयजल किल्लत गहराने लगी है। अब एकमात्र सहारा पारंपरिक जल स्रोत हैं, लेकिन अधिकांश स्रोतों का जल स्तर घटने लगा है। ताड़ीखेत ब्लॉक के ग्रामीण इलाकों में पर्याप्त आपूर्ति नहीं होने के कारण लोग परेशान हैं। पिछले दो हफ्ते से यह समस्या बनी हुई है। विभाग एक दिन छोड़कर पानी देता है, इसके बावजूद आपूर्ति नहीं हो पा रही है, यही हालात रहे तो समस्या गहरा सकती है।
ताड़ीखेत विकासखंड के ग्रामीण इलाकों में ताड़ीखेत-गगास पेयजल पंपिंग योजना से पानी मिलता है। इस योजना से क्षेत्र की 42 ग्राम सभाएं जुडी हुई हैं। 1970 में योजना का निर्माण हुआ, लेकिन तब से पुनर्गठन नहीं होने के कारण पाइप लाइनें जीर्ण-शीर्ण हालत में हैं और आए दिन क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। जल संस्थान पिछले कई वर्षों से क्षेत्र में एक दिन छोड़कर पानी मुहैया कराता है। तपन बढ़ने के कारण अब पेयजल किल्लत और सिर उठाने लगी है, लोग पारंपरिक नौलों धारों पर निर्भर होकर रह गए हैं।
चिलियानौला क्षेत्र में पानी की सबसे अधिक किल्लत हैं, यहां पारंपरिक स्रोतों की संख्या भी ठीक ठाक है, लेकिन संरक्षण के अभाव में अब नौले-धारे भी जवाब दे चुके हैं, अधिकांश स्रोतों का जल स्तर घट चुका है, जिसके चलते लोगों को भारी परेशानी हो रही है।