मोहन उप्रेती लोक संस्कृति कला और विज्ञान शोध समिति की ओर से आयोजित रचना दिवस महोत्सव में छठे दिन कलाकारों ने रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत कर बहुरंगी रंग बिखेरे। हेमंत जोशी द्वारा संपादित, डा. शिवओम अंबर की पुस्तक ‘आलोक अभ्यर्चन’ का विमोचन भी किया गया। पुस्तक का मुखपृष्ठ पद्मश्री डा. यशोधर मठपाल द्वारा बनाया गया है।
गायिका लता पांडे ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने रंगकर्मी मोहन उप्रेती के कृतित्व, व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। संतोष कुमार ने बांसुरी वादन के जरिए कुमाऊंनी गीतों की मनमोहक प्रस्तुति देकर वाहवाही बटोरी। रचना दिवस के तहत जीजीआईसी अल्मोड़ा में आयोजित लोकसंगीत कार्यक्रम में गायिका लता पांडे ने ‘ओ पाणी पन्यरा खिल-खिल किलै हंसै छै’, शेखर सिजवाली ने ‘देवी बाराही मेरी सेवा लिये’, ‘स्वर्ग तारा जुन्याली राता को, सुंणलौ तेरी-मेरी बाता’ आदि कुमाऊंनी गीतों की शानदार प्रस्तुति दी।
जिसे सुनकर लोग झूमने के लिए मजबूर हो गए। कार्यक्रम में मां लोक संस्कृति समिति, उत्तरांचल पर्वतीय कला केंद्र, दर्पण समिति के कलाकारों ने कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। उत्तरांचल पर्वतीय कला केंद्र के कलाकारों ने गढ़वाली लोकगाथा रामी का मंचन किया। मुख्य अतिथि प्रो. देव सिंह पोखरिया, विशिष्ट अतिथि मनोहर बृजवाल थे। कार्यक्रम संयोजक चंद्रकला भट्ट ने बताया कि रचना दिवस में ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ने के लिए स्कूलों में भी लोकसंगीत के आयोजन की शुरुआत की गई है।