गोरखा समाज की ओर से प्रसिद्ध चिकित्सक रहे डा. गजेंद्र थापा की स्मृति में कार्यक्रम आयोजित हुआ। वक्ताओं ने कहा कि डा. थापा ने जनता की नि:स्वार्थ भाव से सेवा की। उन्हें समाज के लिए प्रेरणा श्रोत बताया गया।
मुख्य अतिथि डा. नलिन पांडे ने कहा कि वर्तमान में चिकित्सा सेवा न होकर व्यवसाय हो गया है। जो कि चिंताजनक है। डॉक्टरों में मानवीय संवेदना का होना जरूरी है। अध्यक्षता करते हुए पूर्व उच्च शिक्षा सचिव प्रो. मोहन लाल टम्टा ने कहा कि डा. गजेंद्र केवल अल्मोड़ा में ही नहीं बल्कि गढ़वाल में भी लोकप्रिय थे। उन्होंने कहा कि अल्मोड़ा में बनने वाले मेडिकल कालेज में एक फैकल्टी डा. थापा के नाम से खोली जानी चाहिए।
डा. शमशेर सिंह बिष्ट ने डा. गजेंद्र थापा के जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सामान्य तौर पर मरीज डाक्टर के पास जाता है, लेकिन डा. गजेंद्र थापा रोगियों के पास जाकर उनका उपचार करते थे। वरिष्ठ पत्रकार पीसी जोशी ने कहा कि डाक्टरों में पैसे की बढ़ती भूख चिंताजनक है। ऐसे में निर्धन लोगों की चिकित्सा सोचनीय हो गई है।
डा. थापा टीबी रोग की दवा के आविष्कारक भी थे। इस अवसर पर लता पांडे, आर्मी स्कूल की संगीत शिक्षिका अन्नू बोरा, मुकुल कुमार, पंकज कुमार, मनमोहन चौधरी ने भजन गाया। कार्यक्रम में नर्सिंग क्षेत्र में विशेष योगदान देने के लिए हेमा राना को सम्मानित किया गया।
इसके अलावा डा. नलिन पांडे, मोहन चंद्र टम्टा, गोरखा समाज के अध्यक्ष एसबी राना, डा. जेसी दुर्गापाल को भी सम्मानित किया गया। संयोजक जग बहादुर थापा ने सभी का आभार जताया। संचालन दयाकृष्ण कांडपाल ने किया। इस अवसर पर पूरन चंद्र तिवारी, आरएस राना, दयाशंकर टम्टा, मदन लाल साह, लीला टम्टा आदि मौजूद थे।