फोटो- 03एएलएम07पी- डामर के अभाव में बदहाल पड़ी चिलियानौला–दाड़िमी सड़क। संवाद
रानीखेत (अल्मोड़ा) पर्वतीय क्षेत्रों में नई सड़कों का निर्माण तो हुआ है लेकिन डामरीकरण न होने से स्थानीय लोगों की परेशानियां कम होने के बजाय और बढ़ गई हैं। विकास खंड ताड़ीखेत के पाली-मोवड़ी, गनियाद्योली–मल्ला विश्वा, चिलियानौला–दाड़िमी सहित कई सड़कों पर अब तक डामर नहीं बिछ पाया है जबकि गैरा–बिल्लेख, चंद्रकोट गांवों को जोड़ने वाली सड़कें आज भी कागजों में ही अटकी हैं। कच्ची और उबड़-खाबड़ सड़कों के कारण ग्रामीणों को रोजमर्रा के आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है और बरसात में कीचड़ व फिसलन से हालात और बिगड़ जाते हैं।
जंगल कटने से वन्यजीवों का रुख गांवों की ओर
सड़क निर्माण के लिए पेड़ों की बड़े स्तर पर कटाई से जंगली जानवरों का प्राकृतिक आवास बुरी तरह प्रभावित हुआ है। तेंदुए और जंगली सुअर अब अक्सर गांवों तक पहुंच रहे हैं और इनके दिखने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। इससे ग्रामीणों में दहशत के साथ-साथ सुरक्षा को लेकर चिंता भी बढ़ गई है।
पशुपालकों की आय पर संकट, पलायन की नौबत
वन्यजीवों के हमलों से मवेशियों के मरने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं जिससे पशुपालकों को गंभीर आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। कई परिवारों की आय का मुख्य स्रोत मवेशी ही होते हैं इसलिए एक-एक जानवर के जाने से उनकी आजीविका पर गहरा प्रभाव पड़ा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि स्थिति पर जल्द नियंत्रण नहीं हुआ तो पलायन बढ़ेगा।
विभाग के तहत आने वाली सड़कों का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। स्वीकृति के बाद ही कार्य संभव है। वही कई अन्य सड़कों को लेकर पत्राचार किया गया है।
-अजय टम्टा, सहायक अभियंता, प्रांतीय खंड लोनिवि, रानीखेत
विभाग समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाते रहता है। साथ ही जिन इलाकों में वन्यजीव गतिविधियों की सूचना मिलती है विभाग कार्रवाई करता है।
-तापस मिश्रा, वन क्षेत्राधिकारी रानीखेत