प्रदेश की बड़ी छावनियों में शुमार रानीखेत छावनी परिषद में इमारती लकड़ी का टॉल तक नहीं है। यहां छावनी क्षेत्र में पुराने लकड़ी के भवन बहुतायत संख्या में हैं। इमारती लकड़ी के अभाव में इन भवनों की लंबे समय से मरम्मत नहीं हो पा रही है। कई परिवार इन जीर्ण भवनों में रहने को विवश हैं, जिस कारण कभी भी दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
जरूरी बाजार, खड़ी बाजार क्षेत्र में अधिकांश पुराने लकड़ी के भवन हैं। कई मकान मरम्मत के अभाव में बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हैं। छावनी परिषद के पास इमारती लकड़ी का टाल नहीं होने से लकड़ी उपलब्ध नहीं हो पाती है। जिस कारण इस तरह के भवनों की मरम्मत नहीं हो पाती।
कई लोग क्षतिग्रस्त भवनों में रहने को मजबूर हैं। ऐसे में कभी भी दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। छावनी परिषद के उपाध्यक्ष मोहन नेगी ने बताया कि इमारती लकड़ी का टॉल खोलने की मांग को लेकर पूर्व में उन्होंने मुख्य अधिशासी अधिकारी और डीएफओ को भी पत्र भेजे थे।
अधिकारियों की तरफ से आश्वासन भी दिए गए थे, लेकिन लकड़ी का टाल अस्तित्व में नहीं आ सका है। कहा कि इमारती लकड़ी न होने से मरम्मत का कार्य नहीं हो पा रहा है। जिस कारण नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
लकड़ी से बनने वाले अन्य वस्तुओं के लिए भी लोगों को दिक्कतें होती हैं। उन्होंने सुझाव भी दिया कि मालरोड स्थित कोयला टाल के पास छावनी परिषद की खाली भूमि पड़ी है, यहां वन निगम के माध्यम से लकड़ी का टाल खोला जा सकता है।