किसी भी शहर में धर्मशाला राहगीरों के रात्रि विश्राम के लिए प्रमुख जरूरत होती है, लेकिन एक दशक बीतने के बाद भी कुमाऊं के प्रमुख शहर अल्मोड़ा में धर्मशाला का निर्माण नहीं हो सका है। इस कारण गरीब राहगीरों के लिए रात्रि विश्राम की शहर में कोई व्यवस्था नहीं है। उन्हें रात गुजारने के लिए महंगे होटलों की शरण लेनी पड़ती है। पिछले साल प्रदेश मंत्रिमंडल ने धर्मशाला निर्माण के लिए एक करोड़ रुपये मंजूर किए थे, जबकि पर्यटन मंत्री ने अलग से 50 लाख रुपये देने की घोषणा की थी, लेकिन बजट अब तक नहीं मिला है।
प्राचीनकाल से ही शहरों और कस्बों में राहगीरों के रात्रि विश्राम के लिए धर्मशालाएं होती थीं, पूर्व में जो धर्मशालाएं थी वह जीर्ण-शीर्ण हो गई हैं। कई शहरों में जीर्ण-शीर्ण धर्मशालाओं का नवर्निर्माण हो गया है। अल्मोड़ा शहर में भी पूर्व में मालरोड में हरि प्रसाद टम्टा और मिलन चौक के समीप लोकनाथ पंत धर्मशाला थी। जीर्ण-शीर्ण स्थिति में पहुंचने पर पालिका परिषद ने इन धर्मशालाओं को करीब डेढ़ दशक पूर्व ध्वस्त कर दिया था। इनके स्थान पर नई धर्मशालाओं का निर्माण होना था पर अब तक धर्मशालाएं नहीं बन सकी हैं।
शहर में धर्मशालाओं के अभाव में बाहर से आकर रुकने वाले राहगीरों खासकर गरीब मुसाफिरों को रात बिताने के लिए महंगे होटलों में ठहरना पड़ता है। सरकार ने पूर्व में इन धर्मशालाओं के लिए क्रमश: 40 लाख और 27 लाख रुपये अवमुक्त भी किए थे, लेकिन पिछली पालिका बोर्ड ने यह पैसा दूसरे मदों में खर्च कर दिया।
मुख्यमंत्री हरीश रावत सरकार के मंत्रिमंडल ने हरिप्रसाद टम्टा धर्मशाला के लिए एक करोड़ रुपये पिछले साल स्वीकृत किए थे। वहीं तत्कालीन पर्यटन मंत्री दिनेश धनै ने भी टम्टा धर्मशाला के लिए 50 लाख रुपये देने की घोषणा की थी, पर यह पैसा अब तक नहीं मिल पाया है। विभिन्न संगठन पूर्व में टम्टा धर्मशाला निर्माण की मांग को लेकर आंदोलन भी कर चुके हैं।
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हरि प्रसाद टम्टा धर्मशाला बनाने के लिए कांग्रेस शासनकाल में मंत्रिमंडल ने एक करोड़ रुपये की स्वीकृति दी थी। वहीं तत्कालीन पर्यटन मंत्री ने 50 लाख रुपये देने की घोषणा की थी, पर यह पैसा अब तक नहीं मिला है। इस संबंध में भाजपा सरकार को भी पत्र भेजकर बजट आवंटन की मांग की गई है।
प्रकाश चंद्र जोशी, नगर पालिकाध्यक्ष, अल्मोड़ा।