अल्माेड़ा। नगर की एक लाख से अधिक की आबादी की प्यास बुझाने वाले कोसी बैराज (जलाशय) में सिल्ट जमा होने से इसके क्षमता 40 करोड़ से घटकर 35 करोड़ लीटर रह गई। इससे भविष्य में नगर क्षेत्र में पेयजल संकट गहराने के आसार हैं।
जीवदायनी कोसी पर बने बैराज में घटते जलस्तर की समस्या को अमर उजाला ने अपने 27 नवंबर के अंक दो वर्षों में पांच करोड़ लीटर तक घट गया कोसी बैराज का जल स्तर शीर्षक के साथ प्रमुखता से प्रकाशित किया।
खबर का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी अंशुल सिंह ने कोसी बैराज का स्थलीय निरीक्षण किया। डीएम ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को बैराज से जल्द से जल्द सिल्ट हटाने के निर्देश दिए।
उन्होंने बैराज की फेंसिंग करने और बाहरी व्यक्ति के यहां प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगाने की बात कही। कोसी बैराज पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। कहा कि यहां प्राकृतिक सौंदर्य और शांति है। साथ ही यहां इको-टूरिज्म, वाटर एक्टिविटीज, पिकनिक स्पॉट विकास, ट्रैकिंग ट्रेल्स, व्यू पॉइंट विकसित किए जा सकते हैं। उन्होंने अधिकारियों को पर्यटन विकास से जुड़े बुनियादी ढांचे का सर्वे तैयार करने के निर्देश दिए। ताकि इससे जिले में पर्यटन कारोबार को नए पंख लग सकें।
बैराज क्षेत्र की भूमि के सीमांकन के निर्देश दिए
डीएम ने मुख्यमार्ग से बैराज तक आकर्षक फूलों उगाने, हेरिटेज पोल, द्वार स्थापित करने सोलर लाइट स्थापित करने की बात कही। उन्होंने बैराज क्षेत्र की भूमि का सीमांकन कर पर्यटन गतिविधियों को लेकर संपूर्ण प्लान तैयार किया जाए। बैराज में बोटिंग, जिपलाइन पर्यटन, कैफे एरिया, पार्क और कैंटीन के संचालन के लिए भी योजना तैयार की जाए। डीएम ने कोसी बोट हाउस का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उप निदेशक पर्यटन प्रकाश सिंह खत्री, सिंचाई विभाग के अधिशाषी अभियंता सिंचाई मोहन सिंह रावत आदि मौजूद रहे।