मौलेखाल (अल्मोड़ा)। सल्ट के दिव्यांग धीरज मजबूत हौसलों का सजग उदाहरण हैं। करंट से दोनों हाथ गंवाने वाले धीरज को जब कहीं से मदद नहीं मिली तो उन्होंने अपनी लड़ाई खुद लड़ने की ठानी। पैरों से पेंटिंग बनाने का प्रशिक्षण लिया और वे हौसले से अपने जीवन में रंग भरने की कोशिश में जुट गए। हुनर ऐसा कि अपने पैरों से वह सामने बैठे व्यक्ति की हूबहू तस्वीर कागजों पर उकेर देते हैं। अपने हुनर के दम पर वह खुद के साथ अपनी मां को भी पाल रहे हैं।
सल्ट विकासखंड के भ्याड़ी निवासी 37 वर्षीय धीरज पाल को सरकारी मशीनरी की अनदेखी का शिकार होना पड़ा है। महज 14 वर्ष की उम्र में करंट से उन्हें अपने दोनों हाथ गंवाने पड़े। इसके दो वर्ष बाद ही सिर से पिता का साया उठ गया और मां परुली देवी ही उनका सहारा थीं। ऐसे में उन्हें अपना जीवन बोझ लगने लगा था लेकिन उन्होंने हौसले से जीवन जीने के साथ ही मां की जिम्मेदारी उठाने की ठानी।
अपनी दिव्यांगता को दरकिनार कर धीरज ने रामनगर में पैरों से पेंटिंग बनाने का प्रशिक्षण लिया और आज वह अपने हुनर से सबको चौंका रहे हैं। पैरों से न केवल मनरेगा के बोर्ड तैयार कर रहे हैं बल्कि सामने बैठे व्यक्ति की हूबहू तस्वीर कागज पर उकेरने और उनमें रंग भरने की उन्हें महारथ हासिल है।
हैरानी की बात यह है कि उनकी इस कलाकारी पर किसी की नजर नहीं पड़ी है और उनका यह हुनर सिर्फ घर तक सीमित है। सरकारी तौर पर भी उन्हें महज दिव्यांग पेंशन देकर औपचारिकता निभाई जा रही है। वर्तमान में दोनों मां-बेटा जीर्णशीर्ण मकान में रहकर किसी तरह दिन गुजार रहे हैं।
डोगरा रेजिमेंट ने खरीदी पेंटिंग तो मरचूला महोत्सव में पाया पहला स्थान
मौलेखाल। धीरज अपने खर्च से कागज और रंग खरीदकर घर पर चित्रकारी करते हैं। एक वर्ष पूर्व सल्ट में हुए आजादी के अमृत महोत्सव के दौरान यहां पहुंची डोगरा रेजिमेंट के अधिकारियों ने उनकी पेंटिंग देखी तो वे धीरज के मुरीद हो गए और पेंटिंग को खरीद लिया। वहीं दो वर्ष पूर्व मरचूला में हुए महोत्सव के दौरान हुई पेंटिंग प्रतियोगिता में धीरज ने सभी को पछाड़कर पैरों से सुंदर चित्रकारी करते हुए पहला स्थान प्राप्त किया। तब उनकी सभी ने सराहना की लेकिन समय के साथ सभी अब उन्हें भूल गए हैं। संवाद
धीरज को पैरों से चित्रकारी में महारथ हासिल है। सीएम राहत कोष के लिए उनका आवेदन प्रस्तुत किया गया है। मनरेगा सहित अन्य कार्यों में उनके माध्यम से बोर्ड तैयार करवाने के तहसीलदार को निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन उनकी हरसंभव मदद करने का प्रयास कर रहा है। - गौरव पांडे, एसडीएम, सल्ट।