जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान अल्मोड़ा में आयोजित बाल शोध मेले में पहुंचे बच्चों को कई जानकारियां दी गईं। जिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा कि प्राथमिक शिक्षा में ही बच्चों का बौद्धिक विकास हो सके इसके लिए बाल शोध मेला सहित अन्य रचनात्मक कार्यों को प्राथमिकता देनी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि विद्यालयी अध्ययन विकास कार्यक्रम बच्चों के लिए उपयोगी साबित होगा। उन्होंने बच्चों से कई सवाल पूछे और उनकी तैयारियों की सराहना की। उन्होंने डायट और अजीम प्रेमजी फाउंडेशन द्वारा किए जा रहे कार्यों की भी सराहना की और कहा कि भविष्य में इस तरह के कार्यक्रम न्याय पंचायत स्तर और विकासखंड स्तर पर भी आयोजित किए जाएं।
डायट के जेके जोशी और जीएस गैड़ा ने बताया कि डायट के माध्यम से 26 स्कूलों के शिक्षक-शिक्षिकाओं को दस दिन का प्रशिक्षण दिया गया था। प्रशिक्षण के बाद शिक्षकों ने स्कूलों में बच्चों को दो महीने का प्रशिक्षण दिया। अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के कार्यकर्ताओं ने कई विषयों की जानकारी दी।
डायट के प्राचार्य डा. आर सिंह ने कहा कि इस तरह के बौद्धिक विकास के कार्यक्रमों में सभी की सहभागिता अनिवार्य है तभी इस तरह के कार्यक्रम सफल हो सकेंगे। मुख्य शिक्षाधिकारी वीएन सिंह ने भी विचार रखे। इस मौके पर डा. हरीश जोशी, प्रकाश पंत, कैलाश कांडपाल समेत दुगालखोला, माट, सरना, चितई, खत्याड़ी, तलाड़ के दस स्कूलों के छात्र-छात्राओं, शिक्षकों ने भाग लिया।