अल्मोड़ा। बाल विकास राज्य मंत्री रेखा आर्या और मेडिकल कालेज प्राचार्य आरजी नौटियाल के बीच हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस विवाद ने बैठे बिठाए कांग्रेस को भी मुद्दा दे दिया है। कांग्रेस ने प्रोटोकाल के नाम पर प्राचार्य को हटाने के प्रयास को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है। दूसरी तरफ भाजपा के तमाम नेताओं ने प्राचार्य को हटाने के लिए कमर कसी हुई है।
कांग्रेस नगर अध्यक्ष पूरन रौतेला ने कहा है कि 11 जून को हुई बैठक में भाजपा पदाधिकारियों को बैठाकर मंत्री ने स्वयं प्रोटोकाल का उल्लंघन किया है। मंत्री और विधानसभा उपाध्यक्ष दोनों ही भाजपा के हैं। बैठक में मौजूद प्राचार्य के विधानसभा उपाध्यक्ष का फोन उठाने को तूल देना और उन पर दबाव बनाना ठीक नहीं है। यदि भाजपा के लोग एक-दूसरे को नीचा दिखाने के लिए प्राचार्य का तबादला करवाते रहेंगे तो मेडिकल कालेज अस्तित्व में कैसे आएगा। भाजपा इस गुटबाजी को पार्टी के भीतर ही रखे। यदि प्रोटोकाल उल्लंघन के नाम पर प्राचार्य का तबादला किया जाता है तो यह शर्मनाक होगा।
दूसरी ओर भाजपा के जिला मंत्री विनीत बिष्ट ने कहा है कि मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य राजनीति करने में व्यस्त हैं। कोविड प्रभारी मंत्री की बैठक को मुद्दा बनाकर सरकार और मंत्री को बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है। प्राचार्य कार्य के प्रति जिम्मेदार होते तो मेडिकल कालेज अब तक काम करने लगता। बैठक में प्राचार्य का व्यवहार खेदजनक और आपत्तिजनक था। प्राचार्य अपने ऊपर गाने बनवाने में व्यस्त हैं। उन्होंने कहा है कि सरकार को ऐसे गैर जिम्मेदार अधिकारी को तुरंत प्रभाव से दायित्व मुक्त कर कार्रवाई करनी चाहिए। सरकार प्राचार्य के कार्यकाल की जांच करे।
कोविड की बैठक लेते वक्त प्राचार्य ने फोन उठाकर प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया है। प्राचार्य बेमन से कार्य कर रहे हैं, इससे पूर्व दो बार इस्तीफे की पेशकश कर चुके हैं। वह अधिकारी कर्मचारी नियमावली के विरुद्ध काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य सचिव से उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। - रेखा आर्या, राज्य मंत्री।
मुझे घसीटा जाना ठीक नहीं : चौहान
गंभीर मरीज को भर्ती करने को लेकर मेडिकल कालेज के प्राचार्य आरजी नौटियाल को फोन किया था। प्राचार्य ने मंत्री की बैठक का हवाला दिया और फिर फोन रख दिया था। यह इतने बड़े विवाद का विषय नहीं है। इस विवाद में मुझे नहीं घसीटा जाना चाहिए। जनप्रतिनिधि और जनता यदि फोन करें तो अधिकारियों को फोन रिसीव करना चाहिए। मुझे फोन करने का अधिकार है। अच्छा होता कि मंत्री और प्राचार्य परिश्रम कर मेडिकल कालेज को संचालित करने का काम करते। कोरोना काल में संवेदनशील होना चाहिए। इस विषय में विवाद ठीक नहीं है। - रघुनाथ सिंह चौहान, विधानसभा उपाध्यक्ष।
फोन उठाना प्रोटोकाल का उल्लंघन नहीं : कुंजवाल
प्रदेश सरकार की जिम्मेदार मंत्री का इस तरह जानबूझकर विवाद को बढ़ाना उचित नहीं है। अधिकारी का बैठक में फोन रिसीव करना कोई प्रोटोकाल का उल्लंघन नहीं होता है। प्राचार्य ने फोन रिसीव कर लंबी बात नहीं की है। प्राचार्य ने कहा कि मंत्री की बैठक में हैं बाद में बात करेंगे। मेडिकल कालेज में इस तरह अभी से विवाद को बढ़ावा देना अच्छा नहीं है। इससे मेडिकल कालेज को संचालित करने में भी दिक्कतें आएंगी। - गोविंद सिंह कुंजवाल, विधायक जागेश्वर।
मंत्री ने इसे नाक का सवाल बनाया : माहरा
मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. राम गोपाल नौटियाल प्राचार्य के साथ ही एक डॉक्टर भी हैं। कोरोनाकाल में डॉक्टरों की कई प्राथमिकताएं हैं। हो सकता है बैठक के दौरान डॉ. नौटियाल को इमरजेंसी फोन किया गया हो। उस वक्त प्रोटोकाल से अधिक मरीज की जान बचानी जरूरी होती है। बाल विकास मंत्री ने जबरदस्ती इसे अपनी नाक का सवाल बना लिया। उन्हें अहं को किनारे रखते हुए इसे मुद्दा नहीं बनाना चाहिए। -करन माहरा, उपनेता कांग्रेस विधानमंडल दल, विधायक रानीखेत।