आपदा में क्षतिग्रस्त सिंचाई नहरें
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रानीखेत/द्वाराहाट। रानीखेत और द्वाराहाट क्षेत्र के अधिकांश नहरों की हालत खराब है। 2010 की आपदा में क्षतिग्रस्त नहरों की मरम्मत न होने से हजारों नाली भूमि बंजर होने की कगार पर है। सिंचाई के अभाव में कई स्थानों पर सब्जी उत्पादन भी ठप है। काश्तकारों का कहना है कि सिंचाई के लिए नहरें बनाई गई, लेकिन कई नहरों में निर्माण के बाद से ही पानी की बूंद नहीं टपकी है। जांच के नाम पर भी कुछ नहीं हुआ।
ताड़ीखेत ब्लॉक के अंतर्गत गगास से बनी कोठारसेरा नहर 2010 की आपदा में बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई थी, लेकिन छह साल बाद भी इस नहर की मरम्मत नहीं हो पाई है। जिस कारण काश्तकार सिंचाई के लिए परेशान है। ग्रामीणों का कहना है कि तिपौला-बलाड़, टूनाकोट, गैरड़ और पनौरा नहरों की हालत भी ठीक नहीं है। यह सभी नहरें 2010 और उसके बाद आई आपदा के कारण कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गई थी, हालांकि कई बार इन नहरों में मरम्मत का कार्य हुआ, लेकिन इससे कोई राहत नहीं मिल रही है।
इन क्षेत्रों में सब्जी और प्रचुर मात्रा में अनाज का उत्पादन होता है, लेकिन पानी के अभाव में सब चौपट होने की कगार पर है। खीरो नदी से बनी बड़ेत सिंचाई नहर 1984-85 में बनी। दो किमी लंबी इस नहर में निर्माण के बाद से ही पानी नहीं आया। काश्तकार इससे पहले गूलों के माध्यम से खेतों की सिंचाई करते थे, लेकिन नहर बनने के बाद गूलें भी बंद हो गई। इस मामले की जांच भी ठंडे बस्ते में चली गई। कफड़ा गधेरे से बनी एक किमी लंबी उभ्याड़ी नहर भी 2010 की आपदा में क्षतिग्रस्त हो गई थी, यह नहर भी आज तक ठीक नहीं हुई।
दोसाद गधेरे से बनी मल्ला नौगांव, तल्ला नौगांव, बसेरा नहर भी आपतदा में क्षतिग्रस्त हुई थी, यह नहर भी वर्तमान में बंद है। डेढ़ किमी लंबी नहर बंद होने से क्षेत्र में सब्जी उत्पादन का कार्य भी ठप है। दोनों स्थानों पर अधिकांश सिंचाई नहरें खराब होने से लगभग 20 हजार नाली भूमि बंजर होने की कगार पर है। पूर्व प्रधान बचे सिंह बिष्ट ने बताया कि नहरों के निर्माण में लाखों रुपया खर्च हुआ, लेकिन खामियों के चलते काश्तकारों को इनका लाभ नहीं मिल पा रहा है।